एयरलिफ्ट फिल्म वॉलपेपर

एयरलिफ्ट

एयरलिफ्ट सेलिब्रिटीज

Akshay Kumar , Nimrat Kaur


एयरलिफ्ट फिल्म रिव्यू : दर्शकों का कहना है अक्षय कुमार पर हर भारतीय को गर्व है


राजा कृष्ण मेनन द्वारा निर्देशित और लिखित बॉलीवुड फिल्म एयरलिफ्ट बॉक्स ऑफिस पर जादू बिखरने के लिए पहुँच गयी है। प्रोडूसर भूषण कुमार की फिल्म एयरलिफ्ट में अक्षय कुमार और निम्रत कौर लीड रोल में है। वास्तविक जीवन की घटना पर आधारित इस फिल्म को देखने के बाद हर भारतीय को गर्व महसूस होता है क्योकि यह फिल्म जिस युद्ध घटना से ली गयी है उसकी वजह से गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भारत का नाम दर्ज है। जिसमे 500 उड़ानें 59 दिनों में भरकर बड़ी संख्या में (1 लाख 70 हजार) लोगो की जान बचा कर वापिस उनके मुल्क भारत पहुंच दिया गया था।



सत्य घटना पर आधारित थ्रिर्लेर एयरलिफ्ट फिल्म को रिलीज से पहले इसकी तुलना हॉलीवुड फिल्म आर्गो से की जा रही है लेकिन जब आप फिल्म देखेंगे तो एयरलिफ्ट बिलकुल भिन्न लगेंगी। ऑस्कर जीतने वाली आर्गो फिल्म दूसरी तरह का मिशन था जबकि एयरलिफ्ट में आम जनता को जागरूक कर उनको एक कर फिर सबको साथ में लेकर वापिस वतन लौटना होता है।



एयरलिफ्ट फिल्म की पूरी कहानी : रंजीत कात्याल (अक्षय कुमार) कुवैत में बसा अधिक धनी और शक्तिशाली भारतीय बिजनेसमैन है। जिसके परिवार में उनकी पत्नी अमृता (निम्रत कौर) और एक बेटी है। रंजीत कात्याल बेशक भारतीय मूल का था लेकिन वह अपने जीवन की शुरूआती दिनों में भारतीय की तुलना में एक कुवैती होने पर अधिक गर्व महसूस करता था।



इराक कुवैत पर हमला कर देता है तो उसके जीवन में दिलचस्प मोड़ आ जाता है और वह वापस अपने देश 1.70 लाख सुरक्षित भारतीयों को भारत पर गर्व करते हुए लेकर आता है।



सद्दाम हुसैन भारत का पक्षधर था लेकिन भारतीय सरकार सीधे तौर पर उससे भारतीयों के लिए मदद नही मांग सकती थी इसलिए कुवैत से भारतीयों को बाहर निकालने के लिए रंजीत कत्याल को चुना जाता है। रंजीत जिसकी कुवैत सरकार में काफी अच्छी पकड़ थी जिसके बाद भारतीय सरकार और रंजीत मिलकर दुनिया के सबसे रेस्क्यू ऑपरेशन को अंजाम देते है जिसमे सबसे मददगार जांबाज़ पायलट साबित होते है जो तेजी से उड़ान भरते हुए इतने लोगो को सकुशल भारत ला पाते है।


डायरेक्शन : डायरेक्टर राजा कृष्ण मेनन ने एयरलिफ्ट फिल्म की स्क्रिप्ट को सुरेश नायर, राहुल नांगिया, और रितेश शाह के साथ मिलकर अच्छे से तैयार किया है। राजा कृष्ण मेनन की डायरेक्शन की बात करें तो इस फिल्म में उनके डायरेक्शन की सबसे अच्छी बात यह रही है कि असल जीवन पर आधारित इस फिल्म को बनाते समय उन्होंने इस बात पर खास ध्यान दिया है कि युद्ध के दौरान दर्शक भी आराम से भारतीयों और कुवैतियों के बीच आसानी से फर्क समझ सके और उनकी यही बात उनको बेहतर डायरेक्टर की श्रेणी में खड़ा कर देती है।



फिल्म की सिनेमेटोग्राफी भी कमाल की रही है उसमें प्रिया सेठ द्वारा की गयी मेहनत और काबिलियत साफ़ झलकती है। फिल्म की बात करें तो फिल्म के पहले डायलॉग इंसान की ना, फिदरत ही ऐसी होती.. चोट लगती है न, तो आदमी मां मां ही चिल्लाता है से ही दर्शक फिल्म के साथ जुड़ जाते है और वह अंतिम तक बंधे रहते है।


राजा कृष्ण मेनन ने एयरलिफ्ट फिल्म के दूसरे भाग को बड़े ही बेहतरीन अंदाज बनाया है लेकिन उनका पहला भाग थोडा धीमा है जिसकी वजह से कहानी काफी स्लो चलती है।





एक्टिंग : एयरलिफ्ट फिल्म पूरी तरह से अक्षय कुमार की फिल्म है और उन्होंने भी अपनी परर्फोमेंस से रंजीत कात्याल को परदे पर जीवंत कर दिया है। फिल्म में इमोशनल दृश्य हो,बिजनेस टायकून वाले सीन हो या फिर भारतीय तिरंगा आसमान में लहराते हुए गर्व का भाव महसूस करना हो बॉलीवुड खिलाडी अक्षय ने हर सीन में शानदार प्रदर्शन किया है।



अक्षय के बाद में फिल्म में अहम रोल में अभिनेत्री निम्रत कौर है। फिल्म में उनके सीन अधिक नही है लेकिन वह अपने रोल में काफी अच्छी लगी है और अक्षय के साथ उनकी केमिस्ट्री भी दर्शको को काफी पसंद आई है। अक्षय और निम्रत के अतिरिक्त पूरब कोहली और इनामुलहक ने काफी बेहतरीन ढंग से नकरात्मक भूमिका निभाई है। कुमुद मिश्रा और प्रकाश बेलावादी ने भी अपनी अपनी भूमिका को अच्छे से निभाई है।



गीत संगीत : एयरलिफ्ट फिल्म का संगीत म्यूजिक डायरेक्टर अमाल मल्लिक और अंकित तिवारी ने तैयार किया है। फिल्म में कुल चार गीत रखें गए है जिसमें अच्छे रोमांटिक नंबर सोच ना सके और दिल चीज़ तुझे दे दी शामिल है। सोच ना सके गीत अरिजीत सिंह और तुलसी कुमार ने गाया तो दिल तुझे दे दी जो वेस्टर्न और अरबी स्टाइल में है उसे अरिजीत सिंह ने अंकित तिवारी के साथ मिलकर गाया है। इन दोनों गीतों के अतिरिक्त तू भुला जिसे गीत के.के और पंजाबी नंबर मेरा नाचन नु भी है जिसे दिव्या कुमार ने गाया है और उसे अमाल मल्लिक और ब्रिजेश शंद्ल्ल्या ने सहयोग दिया है। फिल्म में गीत बेशक कम है लेकिन अच्छे और शांत है जो फिल्म के साथ अच्छे लगते है।





क्यों देखें : बेबी,नमस्ते लंदन के बाद अक्षय की इस फिल्म से एक बार फिर भारतीय होने पर गर्व होने का अहसास होगा।


क्यों ना देखें : इसकी कोई वजह नही है कम से कम एक बार तो यह फिल्म अवश्य देखी जा सकती है।








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