दंगल फिल्म वॉलपेपर

दंगल

दंगल सेलिब्रिटीज

Aamir Khan , Sakshi Tanwar , Rajkummar Rao , Fatima Sana Shaikh , Sanya Malhotra , Vikram Singh, Gautam Gulati , Zaira Wasim, Suhani Bhatnagar, Aparshakti Khurrana


आमिर खान की दंगल प्रेरणा देने वाली एक धाकड़ फिल्म

दंगल फिल्म का शोर्ट रिव्यू

स्टारकास्ट : आमिर खान, साक्षी तंवर, फातिमा सना शेख, सान्या मल्होत्रा, सुहानी भटनागर, ज़ायरा वसीम, अपरशक्ति खुराना, ऋत्विक सहोरे, गिरीश कुलकर्णी

डायरेक्टर : नीतेश तिवारी

दंगल फिल्म में क्या अच्छा है : आमिर खान की दंगल आपके दिल से सीधा कनेक्ट होती है। एक अविश्वसनीय स्क्रिप्ट और पॉवरफुल प्रदर्शन आपके दिल और दिमाग दोनों को प्रभावित करता है।

दंगल फिल्म में क्या बुरा है : 75 करोड़ की लागत से तैयार इस फिल्म में बहुत कम खामियां है। कुछ भाग में आपको अपने स्वाद के अनुरूप कमियां लग सकती है लेकिन बॉक्स ऑफिस पर इन कमियों का कोई असर नही पड़ेगा।

फिल्म क्यों देखे : आपको यह फिल्म जरुर देखनी चाहिए क्योकि वास्तविक कहानी से प्रेरित इस फिल्म में एक मजबूत नारीवादी संदेश तो शामिल है साथ में इस फिल्म की स्टोरी और एक्टिंग भी कमाल की है।

फिल्म क्यों नही देखे : आमिर खान 2 साल बाद दंगल फिल्म लेकर आए है इसलिए कोई एक वजह नही मिली है जिसके लिए हम यह कह सके कि आपको यह फिल्म नही देखनी चाहिए।

दंगल फिल्म की पूरी समीक्षा

दंगल फिल्म की पूरी कहानी : महावीर सिंह फोगट (आमिर खान) एक राष्ट्रीय स्तर के कुश्ती चैंपियन है जो अपने परिवार की आजीविका कमाने के लिए अपने खेल के सपने को तोड़ने के लिए मजबूर हो जाते है। महावीर सिंह सपना देखता है की उसका बेटा जन्म लेगा और स्वर्ण पदक जीतने की उसकी इच्छा को पूरा कर देगा।

महावीर एक बेटे के लिए प्रयास कर रहा है लेकिन भाग्य ने उसके लिए कुछ और योजना बना कर रखी है। महावीर की पत्नी दया शोभा कौर (साक्षी तंवर) चार बेटियों को जन्म देती है कोई बेटा ना होने की वजह से महावीर का दिल टूट जाता है।

स्थानीय लड़कों के साथ एक लड़ाई में महावीर के बड़ी बेटियां गीता (जैरा वसीम) और बबीता (सुहानी भटनागर) लडको के उपर नीले और काले दाग बना देती है। लडको के परिवार से शिकायतें प्राप्त करने के बाद महावीर को अहसास होता है कि उसकी छोरीयां किसे छोरे की तुलना में कम नही है। अहसास होने के बाद महावीर फौरन लड़कियों को कुश्ती के लिए प्रशिक्षित करना शुरू कर देता है।

युवा लड़कियां कुश्ती की लाइफ से खुश नही है और वह इससे बाहर निकलने की कोशिश करती है। ट्रेनिंग के बाद जल्दी ही लोकल दंगल में गीता एक अच्छे प्रशिक्षित पुरुष पहलवान की खिलाफ जीत जाती जाती है यही से गीता और बबीता की राष्ट्रीय और राष्ट्रमंडल खेलों के लिए सफर शुरू हो जाता है।

दंगल फिल्म का स्क्रिप्ट रिव्यू : नीतेश तिवारी दंगल को लेकर अत्यधिक उत्साहित रहे है। नीतेश ने इस स्पोर्ट्स ड्रामे को सुचारू रूप से जोश और भावनात्मक पक्ष को जोड़ा है। महावीर और उसकी बेटी की प्रेरणादायक कहानी में आप हँसते हैं, रोते हैं और कुछ बिंदु पर आप समाज की जड़ो से भी जुड़ते है। फिल्म के अंत तक आप पत्रों से लगाव महसूस करने लगते है।

सुल्तान के बाद नीतेश तिवारी पर स्क्रिप्ट को लेकर काफी दबाव रहा होगा लेकिन यकीन मानिए कुश्ती को छोड़कर दोनों के कुछ भी समानता नही है। स्क्रिप्ट का पहला भाग आश्चर्यजनक और मासूम है। तिवारी ने अविश्वसनीय रूप से फर्स्ट हाफ में युवा गीता और बबीता के संघर्ष, उनकी किशोरावस्था के मजे को पहलवानों के रूप में प्रशिक्षित करते हुए कनेक्ट रखा है।

सरकार द्वारा खेलो के साथ चल रही लूट और साजिश को पहली छमाही में रखना लेखकों के लिए एक बड़ी जीत है क्योकि दूसरे भाग में दर्शक पूर्ण भावना से कुश्ती खेल में शामिल हो जाते है।

गीता बबिता और महावीर के पिता-बेटी के रिश्तों के भावनात्मक पक्ष को बहुत अच्छी तरह से स्क्रिप्ट में शामिल किया गया है। स्थितियों को बदलने और बहनों के बीच संबंधों का कहानी में अच्छा उपयोग किया गया है।

स्क्रिप्ट के दूसरे भाग में एक सिनेमाई मोड आ जाता है। लड़कियां बड़ी हो गयी है और निपटने के लिए उनके पास नए मुद्दे है। गीता इस भाग में कुश्ती के कई टूर्नामेंट लडती है लेकिन वह पिता के बिना ही रिंग में जाती है। परिवार से दूर स्वतंत्र रूप से रहने के अनुभवों और सभी स्थिति को खुद समान्य से तैयार कर लेना यह देखने वाले सीन है।

स्क्रिप्ट में डायलॉग बिल्कुल तेज और दमदार रखे गए है। मेडलिस्ट पेड़ पर नहीं उगते, उन्हें बनाना पड़ता है प्यार से, लगन से मेहनत से, मैं हमेशा ये सोचके रोता रहा कि छोरा होता तो देश के लिए गोल्ड लाता। ये बात मेरे समझ में न आई कि गोल्ड तो गोल्ड होता है, छोरा लावे या छोरी। अगर सिल्वर जीती तो आज नहीं तो कल तन्ने लोग भूल जावेंगे, गोल्ड जीती तो मिसाल बन जावेगी और मिसालें दी जाती हैं बेटा, भूली नहीं जाती। कल सुबह 5 बजे तैयार रहना यह सभी डायलॉग्स लोगो की जुबान पर चढने वाले सवांद है।

एक्टिंग रिव्यू : दंगल फिल्म मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान के कंधो पर अधिक है और इस फिल्म को देखकर आपको समझ आ जाएगा की बॉलीवुड में आमिर खान को परफेक्शनिस्ट का दर्जा क्यों हासिल है। आमिर ने शारीरिक परिवर्तन के साथ साथ बोलचाल के लहजे में पर ध्यान देकर बड़ी कुशलता से महावीर के चरित्र को अपने अनुरूप ढाल लिया है। फिल्म में आमिर ने अपना शत प्रतिशत दिया है जो काफी सराहनीय है।

आमिर खान के इस शारीरिक परिवर्तन वाली इस फिल्म को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन वाली फिल्मो की लिस्ट में रखा जा सकता है। महावीर की पत्नी की भूमिका के रूप में साक्षी तंवर का चुनाव एक दम ठीक रहा है। उन्होंने बहुत अच्छी तरह से इमोशन सीन पेश किए है। साक्षी का वह सीन काफी अच्छा है जब वह अपने पति के सामने अडियल होकर बोल देती है कि उनकी रसोई में चिकन नही बनेगा।

युवा कलाकारों की बात करें तो गीता के रूप में ज़ायरा वसीम बिल्कुल आश्चर्यजनक लगी है। उन्होंने अपने कॉन्फिडेंस से अपनी लुक कुश्ती दांव हर रूप में खुद को बेहतरीन रूप से पेश किया है। ज़ायरा वसीम की एक्टिंग और लुक दोनों से ही आप प्रभावित होंगे। सुहानी भटनागर ने युवा बबीता के रूप में अच्छा काम किया है। महावीर के युवा भतीजे के रूप में ऋत्विक सहोरे की भी एक्टिंग को ठीक कहा जा सकता है।

फातिमा सना शेख बड़ी गीता के रूप में अद्भुत लगी है। उनको देखकर लगता है भूमिका के लिए अपार प्रशिक्षण लिया होगा। फातिमा का एक सीन महावीर के साथ कुश्ती करने का है जो काफी शानदार है। सान्या मल्होत्रा बड़ी गीता बनी है। मल्होत्रा पूर्ण आत्मविस्वास से भरी और सुलझी हुई कलाकार नजर आती है।

अपरशक्ति खुराना (आयुष्मान खुराना के भाई) ने महावीर के सयाना भतीजे के रूप में अच्छा काम किया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग आपको गुदगुदाती रहती है। गिरीश कुलकर्णी को फिल्म में कोच के रूप में देखा गया है। तिवारी ने इस फिल्म में उनकी घिसी हुई भूमिका रखी है। गिरीश कुलकर्णी एक अच्छे अभिनेता है उनमे बहुत अधिक प्रतिभा है। उनकी भूमिका की सीमा अधिक की जा सकती थी।

डायरेक्शन रिव्यू : नीतेश तिवारी ने बॉलीवुड में भूतनाथ और चिल्लर पार्टी के रूप में काफी अच्छी फ़िल्में दी है, इस बार तिवारी ने खेल बयोपिक फिल्म में हाथ अजमाया है। डायरेक्टर का बयोपिक फिल्म में यह पहला प्रयास था और वह इसमें अत्यधिक सफल हुए है। दमदार दृश्यों के साथ पैक इस मूवी में हर छोटी छोटी बात का ध्यान रखा है।

गीता और बबिता के बालों का कटा होना हो या फिर मां का चुपचाप पति की इच्छा के प्रति असहाय रोने का सीन हो या फिर कोच का गोलगप्पे खाने से इंकार कर यह सब सीन इस फिल्म को उच्च मुकाम तक लेकर जाते है। सिनेमेटोग्राफी सेतु श्रीराम की हरियाणवी परिवेश पर पकड़ काफी अच्छी रही है जिसकी तारीफ़ बनती है।

कुश्ती के सभी सीन बहुत भी सुंदर और लाजवाब तरीके से कैमरे में कैद किए गए है। गीता के कुश्ती के सीन इतने अच्छे तरीके से फिल्माए गए है कि लगता है असली गीता फोगट दंगल में उतरी है। जिन दर्शको को क्रिकेट से अधिक कोई खेल पसंद नही आता है उस भारतीय मानसकिता पर कुश्ती का कामयाब होना निश्चित ही नीतेश तिवारी के लिए अच्छी बात है।

आमिर खान का अपनी बेटी फातिमा सना शेख के साथ लड़ने वाले सीन में डायरेक्शन के कमाल की वजह से जान आ जाती है।

फिल्म के गीत संगीत की बात करें तो हानिकारक बापू धाकड़ और दंगल फिल्म रिलीज से पहले ही दर्शको की नजर में हिट हो चुके है।

दंगल फिल्म वीडियो

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