दृश्यम फिल्म वॉलपेपर

दृश्यम सेलिब्रिटीज

Ajay Devgan , Tabu , Shriya Saran , Ishita Dutta , Rajat Kapoor, Prathamesh Parab


दृश्यम : हत्या के रहस्य को लेकर कमजोर अजय देवगन और होनहार तब्बू के बीच जंग


तेलुगू,कन्नड़ और तमिल भाषा में सफल हो चुकी झूठ को सच बनाने वाली फिल्म दृश्यम का रीमेक अब भारत की सबसे बड़ी फिल्म इंडस्ट्री बॉलीवुड लेकर आया है और निशिकांत कामत की हिंदी दृश्यम की सबसे अच्छी बात यें रही है कि उन्होंने साजिश वाली इस फिल्म की मुख्य पटकथा से कोई छेड़छाड़ करने की कोशिश नही की है। कहानी को दिलचस्प बनाने के लिए कुछ बदलाव जरुर किए है जो फिल्म अधिक मनोरंजक बना देते है।


आप ने हिंदी फिल्मों में अब तक अजय देवगन और तब्बू के बीच रोमांस ही देखे है। पहली बार निशिकांत कामत मर्डर मिस्ट्री की उलझन को दूर करने के लिए तब्बू और अजय देवगन के बीच दिमागी जंग लेकर आए जो आपकी दिमागी कसरत कराने के साथ-साथ आपका पूर्ण मनोरंजन करती है आइयें जानते है फिल्म की कहानी और फिल्म को देखने वाली वजह के बारें में।





दृश्यम फिल्म की पूरी कहानी : दृश्यम फिल्म के कहानी की शुरुआत एक पुलिस स्टेशन से होती है जहाँ एक मध्यवर्गीय युवक विजय सालगॉंवकर (अजय देवगन) बैठा और वह पुलिस द्वारा आम लोगो के साथ किए व्यवहार से बहुत दुखी है।





विजय सालगॉंवकर कम पढ़ा-लिखा एक आम युवक है जो आपनी पत्नी नन्दिनी (श्रिया सरन) के साथ रहता है। विजय और नन्दिनी की दो लड़कियां है जिसमे से उसकी बड़ी बेटी (इशिता दत्ता)गोद ली हुई है। आम परिवार की तरह गोवा में साधारण और ख़ुशी-ख़ुशी रहने वाले इस परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ तब टूट पड़ता है जब सैम नाम का एक युवक टूर पर गयी विजय की बड़ी बेटी की नहाते हुए एमएमएस क्लिप निकाल लेता है।


सैम एमएमएस क्लिप दिखा कर विजय की बड़ी बेटी को ब्लैकमेल करने उसके घर पहुंचता है जहाँ पर नन्दिनी और बेटी के हाथों सैम का कत्ल हो जाता है।





फिल्म की कहानी में यही से मोड़ थ्रिलर शामिल हो जाता है क्योकि सैम को मामूली लड़का नही है वह गोवा पुलिस की आईजी मीरा देशमुख (तब्बू) का बेटा है और जब वह कई सप्ताह तक घर नही पहुचता है तो पुलिस उसकी खोज करते हुए विजय के घर पहुच जाती है।





फिल्म की असली कहानी यही से शुरू होती है और जहाँ एक आईजी माँ अपने बेटे के कातिलों को जेल के अंदर पहुचना चाहती है तो वही चौथी पास एक आम आदमी अपने परिवार के बचाने के लिए बॉलिवुड फिल्मों की कहानियों की मदद लेता है। संस्पेंस और थ्रिलर से भरी इस फिल्म की कहानी का अंत बहुत ही शानदार रहा है।





दृश्यम फिल्म का डायरेक्शन : फिल्म का पहला एक घंटा छोड़ दिया जाएं तो डायरेक्टर ने इस 163 मिनट वाली फिल्म से दर्शकों के सामने ट्विस्ट लाकर फिल्म को एक दिलचस्प रूप से पेश करने में कामयाब हुए है। निशिकांत कामत अपनी इस दिमाग एक्शन वाली इस थ्रिलर फिल्म के लगभग हर सीन से दर्शकों को अंत तक यह सोचने पर मजबूर कर देते है कि अब क्या होने वाला है।





दृश्यम फिल्म की शूटिंग गोवा जैसे रोमांटिक शहर में हुई लेकिन फिल्म के अधिकतर दृश्य पुलिस स्टेशन और घर पर फिल्माए गए है जो कुछ रिव्यू देने वाले लोगो को खासा नही पसंद आया होगा पर हमारा यह मत है की सामान्य दिखने वाले फिल्म के दृश्य ही दृश्यम में जान डाल कर उसे रियल बनाने के काफी करीब ले जाते है।





सस्पेंस वाली इस फिल्म में फिल्म में मां-बेटी, पिता और परिवार के रिश्ते को बहुत ही सरल और बेहतरीन ढंग से परदे पर अच्छे से पेश किया है। फिल्म में कमी की बात करें तो लाउड म्यूज़िक और स्लो-मोशन के डाले कुछ सीन दर्शको को उबाऊ बनाने के साथ-साथ डायरेक्शन की कमी को भी उजागर करते है। डायरेक्शन में कई-कई छोटी-छोटी खामियां पर आम दर्शकों की नजर में यह खामियां फिल्म को बिलकुल प्रभावित नही करती है।








एक्टिंग : दृश्यम फिल्म पूरी की पूरी अजय देवगन और तब्बू की एक्टिंग पर ही निर्भर करती है और दोनों ने दमदार कलाकारों ने इस फिल्म में बहुत ही काबिलेतारीफ एक्टिंग की है।







अजय देवगन ने आम आदमी के रोल निभाते हुए चेहरे पर बहुत ही जबरजस्त एक्सप्रेसशन दिए है और जिस कॉन्फिडेन्स से उन्होंने झूठ बोला है वह दर्शको को सबसे अधिक प्रभावित करता है। फिल्म में उनके साथ दिमागी जंग करने वाली तब्बू ने गुस्से वाली,व्यथित माँ और हताशा से भरी दबंग पुलिस अफसर के किरदार में समोहनीय एक्टिंग की है। इन दोनों कलाकारों के अलावा श्रिया सरन और तनुश्री दुत्ता की बहन इशिता दत्ता और छोटी क्यूट सी बच्ची मृणाल ने ठीक ठाक एक्टिंग कर ली है।





रजत कपूर ने एक छोटे से रोल में भी अच्छा काम किया है और वह दर्शकों को इंप्रेस करने में भी कामयाब रहे है। कमलेश सावंत भ्रष्ट, शोषक, क्रूर बेईमान गायतोंडे पुलिस अधिकारी के रूप में अच्छा आम किया है।





डायलॉग : दिमागी स्टाइल में कानून और आम आदमी के बीच जंग वाली इस फिल्म में वैसे तो सभी डायलॉग दमदार होने चाहिए थे पर कुछ डायलॉग को छोड़कर बाकी के डायलॉग खास प्रभावित नही करते है। मै तो चौथी फेल एक आम आदमी हो जिसकी एक बीवी है और दो बेटियां है और यही मेरी दुनिया है फिल्म का यह डायलॉग है जो लोगो अधिक पसंद आ सकता है। इसके अलावा हर परिवार के कुछ राज होते है जो बाहर ना ही आयें तो अच्छा है और "पुलिस के पास सिर्फ एक सबुत है और वह है हमारा डर" यह डायलॉग भी लोगो को अधिक समय तक याद रह सकता है।





संगीत : अपराध,संस्पेस,थ्रिलर वाली इस फिल्म में गीत-संगीत अगर थोडा अधिक अच्छा होता तो फिल्म और ऊँचा मुकाम हासिल कर लेती। फिल्म में संगीत तो विशाल भारद्वाज ने दिया है पर वह इस फिल्म में वैसा जादू नही चला पायें जैसा ओंकारा में दिया था। फिल्म में कोई ऐसा गीत नही है जिसे आप अपने मोबाइल के प्ले स्टोर में कर सुनने के लिए रख सके।





क्यों ना देखे : अगर आप इस दृश्यम का मुकाबला मोहनलाल की दृश्यम से करते है तो यह उस फिल्म के मुकाबले की नही है।





क्यों देखे : अजय देवगन और तब्बू के टकराव,अदाकारी सस्पेंस और एक अच्छी आम आदमी वाली परिवारिक फिल्म देखने के लिए आप थिएटर तक जरुर जाएं।











दृश्यम फिल्म वीडियो

        

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