फितूर फिल्म वॉलपेपर

फितूर

फितूर सेलिब्रिटीज

Aditya Roy Kapoor , Katrina Kaif , Aditi Rao Hydari


आदित्य रॉय कपूर और कैटरीना कैफ का रोमांस लोगो के गले नही उतरा


फितूर ये इश्क नहीं आसां फिल्म का शोर्ट रिव्यू:


स्टार कास्ट: आदित्य रॉय कपूर, कैटरीना कैफ, तब्बू


निर्देशक: अभिषेक कपूर



फितूर फिल्म में क्या अच्छा है : फितूर फिल्म में सबसे अच्छी बात जो है वह फिल्म की लोकेशन है। कश्मीर के मौसम और वातावरण का काफी अच्छे से कैमरे में कैद किया है जो फिल्म पर अद्भुत रूप से काम करते है। फिल्म के हर फ्रेम को सोच समझ कर एक महान दृश्य के रूप में पेश करने की कोशिश की गयी है जो पहली बार देखने वाले दर्शक को आश्चर्यचकित कर देती है।


फितूर फिल्म में बुरा क्या है : फितूर फिल्म में सबसे बुरा फिल्म की गति है। फिल्म काफी खींचती हुई नजर आती है। एक प्रेम कहानी जो लंबे समय से फैलती जाती है जिसे दर्शक सहन नही कर पाते है।


फिल्म का सबसे अच्छा भाग : फिल्म का दूसरा भाग देखने में काफी आनंद आता है।


फितूर फिल्म क्यों ना देखें : फितूर फिल्म को आप दूसरी लुटेरा फिल्म समझ सकते है जिसमे प्रकृति से प्यार, सरलीकृत लव स्टोरी है जिसे एक आर्टिस्ट पर फिल्माया गया है और ऐसी फिल्मों को बहुत कम दर्शक मिलते है इसलिए हो सकता है आपको यह फिल्म उतनी पसंद ना आयें।


फितूर फिल्म क्यों देखें : फिल्म बिलकुल किसी खुबसूरत पेंटिंग की तरह है जिसमे बेहद शानदार लोकेशंस, संगीत और कटरीना कैफ की खूबसूरती है।


फितूर ये इश्क नहीं आसां फिल्म की पूरी समीक्षा : फितूर फिल्म की कहानी अभिषेक कपूर और सुप्रतीक सेन ने लिखी है। फिल्म की कहानी फितूर फिल्म की कहानी चार्ल्स डिकेंस से प्रेरित है और पूरी तरह से प्यार और सामाजिक विभाजन पर आधारित है।


फितूर फिल्म की कहानी की शुरुआत कश्मीर की रोमांटिक वादियों से शुरू होती है जिसमें लगभग 10 साल का लड़का नूर (आदित्य रॉय कपूर) भाग रहा होता है जिसे खूंखार और डरवाना आंतकवादी अजय देवगन पकड़ लेता है और बच्चे से कहता है कि वह भूखा है और उसे खा जाएगा। कहानी में आगे अजय देवगन बच्चे को छोड़ देता है जिसके बाद नूर घर आता है और आतंकवादी के लिए रोटी लेकर वापिस उसे खिलाने लाता है जिसके बाद अजय देवगन चला जाता है।


फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है जिसमे नूर कही जा रहा होता है तभी अचानक उसके सामने फ़िरदौस(कटरीना कैफ) नाम एक लड़की आती है जो आते ही उसे शट अप बोलती है और कहती है कि निगाहें नीची कैसे कपड़े पहने है।


फिल्म ये दो दृश्य आपस में जुड़ते नही है लेकिन फिर भी कहानी आगे बढती है और नूर फ़िरदौस के घर जाता है जहाँ वह फ़िरदौस की अम्मी बेगम हजरत (तब्बू) अफीम पी कर पड़ी होती है। बेगम हजरत नूर से अजीब अजीब प्यार की बातें करती है और इसी मुलाक़ात में वह बच्चे को नौकरी पर रख लेती है।


लिटिल नूर जो फ़िरदौस के घर पर रहने लगता है जिसकी वजह से दोनों अक्सर साथ में घूमते रहते है और साथ रहते-रहते दोनों के बीच में प्यार पनप उठता है। दोनों बच्चो का प्यार आगे बढ़ता है और फ़िरदौस नूर को अपने बर्थडे पार्टी में दो दिन बाद आने को कहती है। नूर पार्टी में जाने वाला होता है उससे पहले नूर की आपा मर जाती है खैर जैसे-तैसे नूर दो दिन बाद बर्थडे पार्टी में शामिल होने के लिए फ़िरदौस के घर पहुंचता है लेकिन वह उसे एक और दुखद समाचार बेगम हजरत देती है कि फ़िरदौस लंदन चली गयी है इस तरह नूर और फ़िरदौस का बचपन वाला प्यार जुदा हो जाता है।


फिल्म की कहानी आगे चलती है जिसमें नूर बड़ा हो जाता है और बड़ा नूर एक पेंटर बन गया है जो लारा दत्ता के लिए काम करता है। नूर अपने काम के सिलसिले में दिल्ली आता है जहाँ पर फ़िरदौस मौजूद है। फ़िल्मी की कहानी फिर अचानक से मुडती है और फ़िरदौस कश्मीर आ जाती है जिसके बाद फ़िरदौस का उदासी से भरा लेटर वाला दृश्य आता है और फिर फिल्म का पहला भाग समाप्त हो जाता है।

फिल्म के दूसरे भाग में कहानी आगे चलती है जिसमे नूर भी कश्मीर में है और फ़िरदौस की शादी पाकिस्तानी बिलाल (राहुल भट्ट) से होने वाली है। इसके बाद से कहानी कश्मीर दिल्ली लंदन होते हुए बैकराउंड में चली जाती है जहाँ अदिति राव हैदरी की एंट्री होती है जो तब्बू के जवानी के दिनों की जी रही होती है। यहाँ दर्शको को पता चलता है की बेगम हजरत इश्क में धोखा खाने की वजह से मर्दों से नफरत करती है।


फिल्म की स्टोरी आगे बढती रहती है और दृश्यों में अजय देवगन सहित सारे चरित्र बार-बार आते रहते है। फिल्म के अंत से पहले बेगम हजरत मर जाती है। नूर और फ़िरदौस की लव स्टोरी अर्थात प्रेम कहानी का अंजाम क्या होता है यही मालूम करने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना है।


डायरेक्शन और स्क्रिप्ट रिव्यू : फिल्म को अभिषेक कपूर ने डायरेक्ट किया है। फिल्म की स्टोरी की बात करें तो फिल्म में कुछ घटनाएं क्यों घटित हो रही है यह दर्शको को समझ नही आती है। उदाहरण के तौर पर तब्बू का छोटे बच्चे से रोमांटिक बातें करना और आतंकवादी अजय देवगन का नूर को जाने देना और नूर का वापिस आना यह सब ऐसी बातें है जिनका जवाब दर्शकों को नही मिलता है।


फिल्म की स्क्रिप्ट भावनात्मक और मासूमियत से भरी है लेकिन समस्या यह है कि यह कहानी काफी धीमी है।


फिल्म में अभिषेक कपूर के डायरेक्शन की बात करें तो फिल्म के असली नूर अभिषेक कपूर ही है। कैमरे के साथ इस प्रेम कहानी को अपने कैनवास पर बड़ी खूबसूरती से उतारा है। कश्मीर की सुंदरता को फिल्म में देखने के बाद आप जान जायेंगे की सही मायने में कश्मीर को स्वर्ग क्यों कहा जाता है। डायरेक्टर अभिषेक कपूर एक मजबूत स्क्रिप्ट का साथ मिल जाता तो इस फिल्म को और अधिक निखारा जा सकता था। रोमांटिक कहानी की कुछ बिंदुओं पर हुई खामियों को छोड़ दें और सिर्फ अपना ध्यान मासूम युवा प्यार पर रखें तो डायरेक्टर ने फिल्म का चित्रण बखूबी किया है। कश्मीर में जीवन के उतार-चढ़ाव , भयानक दृश्य जहां नूर की बहन मर जाता है और बम विस्फोट के दृश्य तो इतने असली लगते है कि इन दृश्यों पर आप अपना दिल डायरेक्शन को दे देंगे।


एक्टिंग : आदित्य रॉय कपूर ने 23 वर्षीय पेंटर बने लड़के का रोल निभाया है और इस रोल में उन्होंने अपने किरदार को बखूबी निभाया है। आदित्य रॉय कपूर की गर्लफ्रेंड की भूमिका कटरीना कैफ ने अपने रोल को काफी अच्छे से प्ले किये है। कटरीना इस फिल्म में अपने बालों से लेकर पैरों तक काफी ब्यूटीफुल लगी है। राहुल भट्ट,लारा दत्त और अजय देवगन ने अपने छोटे रोल को काफी अच्छे से निभाया है। फितूर फिल्म के एक दृश्य में मिस इंडिया रोशेल राव भी नजर आई है लेकिन वह किसी भी तरह से प्रभाव छोड़ने में कामयाब नही हुई।


एक्टिंग के लिहाज से फिल्म की असली नायक तब्बू लगी है उनका रोल बेशक छिछोरा सा लगता है लेकिन फिर उन्होंने काफी अच्छी एक्टिंग की है। तब्बू से पहले इस रोल को रेखा करने वाली थी लेकिन उनके मना करने के बाद इस रोल को तब्बू ने साइन किया है।


फितूर फिल्म का म्यूजिक रिव्यू : फितूर फिल्म में अमित त्रिवेदी ने बतौर म्यूजिक डायरेक्टर का काम किया है। अमित त्रिवेदी गरीब आदमी का एक आर रहमान कहा जायें तो यह गलत ना होगा। अमित त्रिवेदी इससे पहले डीजे पर बजने वाले गाने लंदन ठुमकदा पर काम करके अपनी प्रतिभा दिखा चुके है। अमित त्रिवेदी हाईवे क्वीन लूटेरा इश्क्जादे और देव डी जैसी फिल्मों में म्यूजिक दिया है।


फितूर फिल्म के गीत शरद ऋतु दिन पर एक कंबल की तरह है जो धीरे-धीरे असर करता है। फिल्म का टाइटल गीत 'ये मेरा फितूर' अरिजीत सिंह ने गाया है। अरिजित के गायन स्टाइल और आवाज में इस गीत को सुनने के बाद आप इस गीत के लिए किसी अन्य की आवाज की कल्पना भी नही कर पाएंगे। ये मेरा फितूर गीत को फिल्म के ट्रेलर में भी स्थान मिला है।


फिल्म का दूसरा गीत पश्मीना सुनने में हल्का जटिल लगता है। पश्मीना गीत अमित त्रिवेदी ने गाया है। प्रशंसको को इस गीत के विडियो का बेसब्री से इंतजार था। पश्मीना गीत में आदित्य और कैटरीना एक कामुक डांस किया है। सुंदर और नग्न पोशाक में हुए हॉट डांस और आदित्य और कैटरीना की केमिस्ट्री ने गीत के शब्दों को चुरा लिया है लोग अब इस गीत को सुनने से अधिक देखना पसंद कर रहे है।


फिल्म में हमीनस्तु और होने दे बतियां जैसे कुछ इतने अच्छे गीत है जिनको आप अपने स्मार्टफोन और कंप्यूटर में सुरक्षित करना रखना चाहेंगे। हमीनस्तु गीत को जेब बंगश ने अपनी आवाज दी है तो होने दे बतियां गीत को नंदिनी श्रीकर और जेब बंगश ने गाया है।


सुनिधि चौहान, जुबिन नौटियाल ने भी इस फिल्म के गीतों में अपनी आवाज का जादू बिखेरा है। सुनिधि चौहान, जुबिन नौटियाल की आवाज में तेरे लिए गीत है जो सरल शब्दों में और म्यूजिक बहुस्तरीय धुन में बना है। फिल्म में रंगा रे नाम का एक गीत है जो हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी में भी है। हिंदी वाला रंगा रे सुनिधि चौहान और अमित त्रिवेदी की आवाज में है जबकि इंग्लिश वाला गीत रंगा रे करालीसा मोंटेइरो तथा अमित त्रिवेदी की आवाज में है। अंग्रेजी वाला रंगा रे सुनने में अधिक प्रभावित करता है। हिंदी वाला भी काफी अच्छा है पर तुलना में इंग्लिश वाला सुनने में अधिक प्रभावित करता है।


फितूर ये इश्क नहीं आसां जादुई और प्रभावशाली प्रदर्शन वाली फिल्म है लेकिन इस फिल्म के लिए आप 'वाह' शब्द का प्रयोग नही कर सकते है। फितूर को वन टाइम वाच मूवी कहना काफी बेहतर होगा।
















फितूर फिल्म वीडियो

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