गब्बर इज बैक फिल्म वॉलपेपर

गब्बर इज बैक सेलिब्रिटीज

Akshay Kumar , Shruti Haasan , Sunil Grover, Suman Talwar, Chitrangada Singh , Kareena Kapoor


21वी सदी का गब्बर दर्शकों को लुभाने में फेल हुआ


शोले फिल्म में अमजद खान द्वारा 1975 में निभाए यादगार चरित्र गब्बर का नया जन्म हो चूका है और वापिस आया गब्बर इस नए अवतार में गब्बर जुर्म करने की बजाय जुर्म रोकने का काम करता है। 21वी सदी के इस गब्बर को देश में हो रहे भ्रष्टाचार बिलकुल पसंद नही है इसलिए वह भ्रष्टाचार करने वालों के खिलाफ लड़ता है और उन्हें मिटा कर ही दम लेता है। फिल्म की समीक्षा करने वाले लोगो ने इस गब्बर को 2 ही स्टार दिए है।





फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार है।


फिल्म बहुत ही धर्मी प्रोफेसर आदित्य जिसका किरदार अक्षय कुमार निभा रहे है। फिल्म भ्रष्टाचार के खिलाफ उनके सघर्ष से शुरू और समाप्त होती है। आदित्य फिल्म में दोहरी जिन्दगी व्यतीत करता है एक तरफ वह प्रोफेसर बन 'नेशनल कॉलेज' में अपने छात्रों के बीच आशा और उद्देश्य की भावना को बढ़ावा देता है तो दूसरी तरफ 'गब्बर' के नाम से एक मिशन पर है और उसकी टीम भ्रष्ट अधिकारियों को खत्म करते हुए अन्य भ्रष्ट अधिकारियों के मन में भय का वातावरण पैदा करती है। आदित्य सभी वर्गो से भ्रष्टाचार मिटाने के क्रम पर चलते हुए वह कभी तहसीलदारों को तो कभी अस्पताल में हो रहे भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ते हुए नजर आता है। जब धर्मी प्रोफेसर भ्रष्टाचार से लड़ रहा होता है तो उसकी मुलाकात फिल्म के खलनायक बिजनेसमैन दिग्विजय पाटिल जो की सुमन तलवार है से होती है और जैसे-जैसे फिल्म आगे बढती है फिल्म में अन्य किरदार जैसे सीबीआई हेड जयदीप अहलावत पुलिस वाले साधु सुनील ग्रोवर के अलावा फिल्म की अभिनेत्री श्रुति हासन जिनका फ़िल्मी नाम भी श्रुति है और वह पेशे से एक वकील है सामने आते रहते है।





डायरेक्टर कृष का गब्बर मास्टरमाइंड है। वह भ्रष्ट अधिकारियों के साथ पुलिस अधिकारियों को चकमा देने में सफल रहता है इसके अलावा कृष का गब्बर भ्रष्ट अधिकारियों और पुलिस अधिकारियों से लड़ते हुए अपने प्यार श्रुति के साथ डेट पर जाने के लिए भी वक़्त निकाल लेता है। गब्बर की जिन्दगी में गर्लफ्रेंड के साथ-साथ फ़्लैश बैक लाइफ में पत्नी करीना कपूर खान भी है। आदित्य अपनी गर्लफ्रेंड और अपनी पत्नी दोनों से रोमांस करते हुए नजर आता है।





फिल्म बॉलीवुड खिलाडी अक्षय कुमार की है इसलिए फिल्म में काफी अच्छे एक्शन है। फिल्म के कुछ एक्शन रिपीट है जो अक्षय अक्सर अपनी फिल्मों में करते आये है। इस फिल्म में अक्षय बेशक आम प्रोफेसर के रोल में हो पर वह किसी एक्शन हीरों या जेम्स बांड से कम नजर नही आते है। फिल्म में कैसी भी परिस्थिति क्यों ना हो वह सब को सबक सिखाने और वहाँ से निकलने में सफल रहता है।





फिल्म की कहानी कई अन्य कहानियों से मिलती जुलती नजर आती है। फिल्म की कहानी बिलकुल साधारण है। निर्देशक कृष ने फिल्म की कहानी को लेकर जितने प्रयोग स्क्रीनप्ले पर किये है उन सब की भरपाई श्रुति हासन को करनी पड़ी है क्योकि फिल्म में श्रुति के रोल में बिलकुल दम नही है। कहानी में कब श्रुति की एंट्री होती है और कब वह गायब हो जाती है ये बात शायद दर्शक याद रख पाए।





एक्शन फिल्म में हीरों के बाद अहम किरदार फिल्म के खलनायक का होता है फिल्म का खलनायक सुमन तलवार कुछ खास नजर नही आये है। साउथ के सुपरस्टार कहें जाने वाले सुमन तलवार के पास फिल्म में एक भी डायलॉग ऐसा नही था जिस कारण उनके इस रोल को लोग याद रख सकें।




फिल्म में अक्षय के बाद अगर किसी ने अपने रोल से छाप छोड़ी है तो वह टीवी चरित्र गुत्थी निभाने वाले सुनील ग्रोवर है। सुनील साधु नाम से पुलिस में 'ड्राइवर' है और वरिष्ठ अधिकारियों में से कोई भी उन्हें गंभीरता से नही लेता है इसी कारण दर्शक उनकी भूमिका के साथ हमदर्दी करते है। फिल्म में छोटा रोल होने की बावजूद साधू काफी प्रभावशाली साबित होता है क्योकि गब्बर को पकड़ने के लिए सबूत और हत्याओं के पीछे कारण समझते हुए भ्रष्टतंत्र को उजागर करने में महत्पूर्ण भूमिका निभाता है।


फिल्म में सबसे अच्छा डायलाग 'अक्षय का खिंचाव, दबाव, तोड़, मोड़ और घुमाव' वाला है जो लोगो को काफी पसंद आ सकता है। इसके अलावा फिल्म में अस्पताल के अंदर दिखाया गया भ्रष्टाचार वाला सीन लोगो के अंतर्मन तक चोट कर सकता है। अस्पताल में डिलीवरी का एक सीन ठीक वैसा फिल्माया गया है जैसा 3 इडियट्स फिल्म के अंत में फिल्माया गया है।





संगीत के मोर्चे पर फिल्म की बात करें तो "तेरी मेरी कहानी" का ट्रैक ही सही है इसके अलावा कोई भी गीत ऐसा नही है जिसे गुनगुनाया जा सके। फिल्म में चित्रांगदा सिंह का एक सेक्सी आइटम गीत है। जिसके 'कुण्डी न खड्काओं राजा' बोल पुराने पंजाबी गीतों से लिए गये है और राव शाह का छायांकन भी काफी साधारण और नीरस रहा है।


फिल्म के अंत की बात करें तो बोर होने की सभी हद को पार कर देता है। ट्रेलर देख कर बड़ी उम्मीदों से फिल्म देखने गये दर्शक 131 मिनट तक की फिल्म देखते हुए एक भी जगह ऐसा महसूस नही करते की फिल्म के लिए ताली बजाई जाएँ। कुल मिलाकर दक्षिणी हिट रमन्ना अधिकारी रीमेक गब्बर इज बैक ऐसी औसत मनोरंजक फिल्म है जिसका टाईटल तो काफी आकर्षित है पर पर फिल्म में दम नही है।






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