घायल वन्स अगेन फिल्म वॉलपेपर

घायल वन्स अगेन सेलिब्रिटीज

Sunny Deol , Soha Ali Khan


घायल वन्स अगेन शोर्ट मूवी रिव्यू


स्टार कास्ट: सनी देओल, सोहा अली खान, ओम पुरी, टिस्का चोपड़ा, नरेंद्र झा


निर्देशक: सनी देओल


घायल वन्स अगेन में क्या अच्छा है : एक्शन दृश्य ही इस फिल्म की जान है। घायल पार्ट 2 में फ्लैशबैक कनेक्टिविटी बहुत ही अच्छे तरीके से काम करता है। घायल वन्स अगेन आपको उड़ा कर कही दूर ले जाती है।


घायल वन्स अगेन में बुरा क्या है : वापस आया अजय मेहरा उस शक्तिशाली रूप में नही है जैसा होना चाहिए। अजय में आक्रामकता की कमी साफ़ झलकती है। फिल्म के कई दृश्यों में ऐसा लगता है जैसे विलन ही हीरो है। फिल्म की स्क्रिप्ट को अगर और टाइट लिखा गया होता तो इस पर काफी बेहतरीन काम हो सकता था।



मजेदार : फिल्म का पहला भाग देखने में काफी बेहतर लग सकता है।


क्यों देखें : इस सप्ताह अगर आप कुछ नही कर रहे है तो घायल वन्स अगेन देखना काफी बेहतर विकल्प हो सकता है। इसके अतिरिक्त अगर आप सनी देओल के बड़े फैन है तो यह भी वजह हो सकती है।


क्यों ना देखें : अगर आप घायल फिल्म के प्रशंसक है और पार्ट 2 घायल वन्स अगेन से वैसे मनोरंजन करने की उम्मीद लगा कर बैठे है तो आप निराश ही होंगे।



घायल वन्स अगेन फिल्म का पूरा रिव्यू :


घायल वन्स अगेन फिल्म की पूरी कहानी
: घायल वन्स अगेन की कहानी फलशबैक 1990 की घायल से शुरू होती है। 1990 से शुरू हुई कहानी बहुत ही अच्छे ढंग से 2016 में कदम रखती है। बलवंत राय को मौत के घाट उतराने वाला अजय मेहरा (सनी देओल) जिसकी पत्नी और बेटी मर चुके है वह एक ऐसा संचालक बन चुका है जो युवाओं की आवाज को अपने अख़बार सत्यकाम नामित में प्रकासित करता है।



घायल 2 की कहानी आगे बढती है और एक लड़की जो बाहर से आई है उसका रेप हो जाता है और उसका रेप एक पुलिसवाले ने किया है। अजय मेहरा को जैसे ही यह ज्ञात होता है वह अपनी टीम लेकर उस पुलिसवाले को उठा लेते है और उसकी अच्छी पिटाई करते है यह दृश्य जैसे ही पूरा होता है इसके बाद फिल्म की कहानी अपने असली ट्रैक पर आना शुरू हो जाता है।।



कहानी के असली ट्रैक में कुछ युवा ऋषभ अरोड़ा (वरुण), शिवम पाटिल (रोहन), अनुष्का (आंचल मुंजाल) और जोया (डायना खान) जो कॉलेज पे पढ़ते है वह पिकनिक पर फोटोशूट और सेल्फी का आनंद ले रहे होते है लेकिन अचानक से उनके फोटोशूट में बिजनेसमैन राज बंसल (नरेंद्र झा) और उसका बेटा एसीपी जो डी सूजा (ओम पूरी) का कत्ल करते हुए आ जाते है।।



कत्ल के बाद युवा कॉलेज के लडके उन तस्वीरों को सत्यकाम के संपदाक अजय मेहरा को देना चाहते है ताकि अजय उन कातिलों को सलाखों के पीछे भेज कर उनको उनके किए की सजा दिला सके लेकिन युवा यह नही जानते है की राज बंसल पूरी मुंबई में सबसे पावरफुल आदमी है जिस वजह से उन युवाओं की अकसर राज बंसल के गुंडों के साथ फाइट होती रहती है और युवा भी हार नही मानना चाहते और वह जल्द से जल्द सबूत अजय मेहरा तक पहुंचाना चाहते है।


घायल 2 की कहानी आगे बढती है और अजय को वह हार्ड डिस्क मिल जाती है यही से फिल्म का पहला भाग समाप्त हो जाता है। फिल्म के दूसरे भाग में मुंबई सडकों पर कत्ल होते रहते है फाइट होती रहती है और अंत में अजय सीधा राज बंसल के घर पर पहुंचता है और फाइट में हारने के बाद वह राज बंसल को मारने की जगह पुलिसवालों के हवाले कर देता है।


स्क्रिप्ट और डायरेक्शन रिव्यू : घायल फिल्म की कहानी और डायरेक्शन फिल्म के नायक सनी देओल ने ही दिया है। यह फिल्म 90 के दशक पर आधारित है उस समय लोगो के दिलों में काफी इमोशंस होते थे और कानून और बड़े आदामी का शिकार हुआ आदामी लोगो के दिलों में घर कर जाता था लेकिन आज का दौर थोडा रियल सिनेमा की मांग अधिक करता है।



घायल 2 की सबसे अफ़सोस बात यह है कि घायल फिल्म जिन पात्रों अजय मेहरा और जो डिसूजा (ओम पुरी) पर पर टिकी थी वह इस नए वर्जन में इस फिल्म को बचाने के लिए पर्याप्त रूप में नही थे। फिल्म के साथ समस्या यह है फिल्म कहना बहुत कुछ चाहती है लेकिन कम दिखाने की कोशिश करती है। डायरेक्टर ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर एक संदेश में भेजना चाहते थे वह तो ठीक था लेकिन अंदाज उस तरह से नही रहा है जैसे दर्शको को उम्मीदें थी।



>बंसल के गुंडों का झुंड युवा बच्चों को मॉल में बेरहमी से मारते है लेकिन लोग और पुलिस हस्तक्षेप नही करते है ऐसे दृश्य पचाने में काफी मुश्किल लगते है। खलनायक को आवश्यकता से अधिक शक्तिशाली दिखा दिया गया है। फिल्म देखने के बाद साफ़ लगता है कि खलनायक पूरे मुंबई शहर का सब कुछ नियंत्रित कर रहा है जो बिलकुल भी समझ से परे है।



खलनायक और नायक के टकराव के दृश्य कुछ अच्छे बन पड़े है जो कुछ देर तक तो दर्शको को सीट पर बैठा कर रखते है। फिल्म के मुख्य चरित्र अजय की तुलना घायल से करें तो अजय मेहरा घायल पार्ट 2 में काफी ठंडा चरित्र रहा है। फिल्म के डायलॉग्स उतने दमदार नही है फिल्म में अगर घायल जितने अच्छे डायलॉग होते तो फिल्म अधिक रंग जमा सकती थी फिल्म में एक डायलॉग ही है जो काफी प्रभावित करता है 'अगर हम सच्च के साथ तो जीतने तक हार नही माननी चाहिए'। फिल्म में डायरेक्टर साहब ने कुछ रखा है तो वह सिर्फ एक्शन ही है जो दर्शको को काफी हद तक पसंद आ जायेगा।


डायरेक्टर ने फिल्म में छोटी-छोटी गलतियां की है जैसे पुलिस का प्रयोग सिर्फ फिल्म के अंत में किया गया है और बंसल के सिक्यूरिटी गार्ड जो विदेश से होते है वह बहुत ही अजीब लहजे में बात करते है जिनको सुनने के बाद आपको सिर्फ हंसी आ सकती है।


घायल वन्स अगेन में एक्टिंग : सनी देओल के 25 साल बाद अजय मेहरा के रूप में वापसी कर रहे है। इस बार अजय मेहरा अर्थात सनी देओल के एक्शन दृश्य तो शानदार है लेकिन भावनात्मक रूप से पूरी तरह से असफल हुए है। इस फिल्म में मेहरा के किरदार में भावनात्मक उथल-पुथल अधिक है जो सनी देओल की इमेज को शूट नही करता है।



सनी देओल के बाद मनोचिकित्सक बनी सोहा अली खान ने एक औसत प्रदर्शन किया है। नरेंद्र झा बने राज बंसल खलनायक का किरदार में सिर्फ निर्देश देने और चिल्लाने का काम ही किया है जो पूरी तरह से बोर करता है। टिस्का चोपड़ा बंसल की पत्नी बनी है और इस भूमिका में उन्होंने अपना काम ठीक से किया है। कॉलेज छात्रों के रोल में रहने वाले एक्टर अपने-अपने रोल में ठीक ठाक ही रहे है।

घायल वन्स अगेन फिल्म वीडियो

        

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