हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म वॉलपेपर

हाफ गर्लफ्रेंड सेलिब्रिटीज

Arjun Kapoor , Shraddha Kapoor


घटिया रोमांस की चाशनी में लिपटी बकवास फिल्म है हाफ गर्लफ्रेंड



हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म का हाफ रिव्यू

स्टार कास्ट : अर्जुन कपूर, श्रद्धा कपूर, रिया चक्रवर्ती, विक्रांत मासी, सीमा बिस्वास

डायरेक्टर : मोहित सूरी

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म में क्या अच्छा है : अरिजीत सिंह द्वारा गाया मै फिर भी तुम्हें चाहूँगा।



हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म में क्या बुरा है : पूरी फिल्म में श्रद्धा कपूर की जांघ वह संभवतः फिल्म में कुछ कुछ होता है कि रानी मुखर्जी के साथ मुकाबला करती हुई नजर आती है और इसी कोशिश में शायद अंग्रेजी गाने गा रही थीं। इस फिल्म में आप जितनी बार मर्जी ब्रेक ले सकते है क्योकि यह फिल्म आपको सीट पर रोकने का कोई प्रयत्न करती हुई नजर नही आती है।

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म क्यों देखे : बाहर गर्मी बहुत है और आप वातानुकूलित मूवी थियेटर में जा कर सोने पर यकीन रखते है तो यह फिल्म आप देख सकते है।



हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म क्यों ना देखे : कमजोर स्क्रीनप्ले, घिसे पिटे डायलॉग, अर्जुन कपूर का घटिया बिहारी लहजा, खिंचा हुआ प्लॉट और डायरेक्शन इतनी कमियां काफी है फिल्म को ना देखने के लिए।

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म का बेहतरीन सीन : आईटी दिग्गज बिल गेट्स बिहार के लड़के माधव की स्पीच सुन रहे हैं फिल्म का यह सीन सबसे बेहतरीन कॉमेडी सीन है।



हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म की पूरी समीक्षा :

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म की पूरी कहानी : हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म की कहानी को चेतन भगत ने लिखी है। फिल्म की कहानी टूटे दिल वाले आशिक माधव झा (अर्जुन कपूर) के फ्लैश बैक में चलती है। माधव झा बिहार के सिमराव के शाही परिवार के एक छात्र हैं उसकी माँ इलाके में एक स्कूल चलाती है। माधव को दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज में खेल कोटा के तहत भर्ती कराया जाता है और वहां उसकी मुलाक़ात रिया सोमानी (श्रद्धा कपूर) से होती है।



रिया, जो एक समृद्ध परिवार से संबंधित दिल्ली लड़की है, अंग्रेजी भी बड़ी सरलता से बोलती है और इस बात से माधव प्रभावित होता है और वह फौरन उसके प्यार में पड़ जाता है और अंग्रेजी ना बोल पाने में वाले माधव को दोनों के कॉमन खेल बास्केटबॉल पर दो बांड के साथ रिया की दोस्ती मिल जाती है। दोनों एक साथ हैंगआउट करते है जिसे माधव डेट समझ लेता है।

वह रिया के प्यार में गिरता चला जाता है लेकिन उसे अंग्रेजी के शब्द में खुद को फिट नही कर पाता है। रिया स्पष्ट रूप से कहती है कि वह उसकी गर्लफ्रेंड नही बन सकती है लेकिन वह उसकी हाफ गर्लफ्रेंड बनने के लिए तैयार है। माधव के दोस्त उसे समझाते है कि वह उसका इस्तेमाल कैफे, सिनेमा हॉल जाने और बास्केटबॉल खेलने के लिए कर रही है। माधव के दिमाग में उस समय रिया के प्यार का जनून होता है और वह उसके साथ शरीरिक होने का प्रयास करता है। शरीरिक होते समय वह रिया के साथ घटिया शब्दों का प्रयोग करते हुए कहता है कि वह देती है तो ठीक नही तो कट लें। इस भद्दी बात को सुनने के बाद रिया उससे ब्रेकअप कर लेती है।



माधव कॉलेज से बाहर निकल जाता है और रिया अमीर एनआरआई लड़का जो उसके बचपन का दोस्त है उसके साथ शादी कर लेती है लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर होता है और दोनों की मुलाक़ात फिर से होती है लेकिन अब रिया एक तलाक़शुदा महिला है जबकि माधव इंग्लिश पढ़ाता है। रिया को देखने के बाद माधव के प्यार के अहसास फिर से जाग जाते है लेकिन रिया उससे शादी करेंगी या फिर से हाफ गर्लफ्रेंड ही बनना पसंद करेंगी यह देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना पड़ेगा।

हाफ गर्लफ्रेंड का स्क्रिप्ट रिव्यू : इस फिल्म की स्क्रिप्ट देखने के बाद आप यह बात जरुर कहंगे की की चेतन भगत की हर किताब पर फिल्म बनाने की जरूरत क्या है। फिल्म की स्क्रिप्ट में गहराई का अभाव है, सिनेमाघर में बैठे दर्शक फिल्म के मुख्य कलाकार माधव के साथ कोई सम्बन्ध नहीं बना पाते है ऐसा लगता है दर्शको को फिल्म के अभिनेता से कोई लेना देना नही है।



माधव झा का चरित्र शुरू में समझदार लगता है लेकिन गलत लड़की के प्यार में पड़ कर वह अपनी इंद्रियों को खो देता है और अपनी भावनाओं को समझ नहीं पा रहा है। माधव भावनाओं की उधेड़ बुन में अपने प्यार को भी छोड़ने में संकोच नहीं करता है जो उसके जीवन का एकमात्र उद्देश्य होती है। फिल्म के अभिनेता के साथ साथ स्क्रिप्ट में अभिनेत्री रिया सोमानी को भी उलझन में ही दिखाया गया है। कौन उससे प्यार करता है वह नही जानती है। वह उन लोगो की भावनाओं की परवाह नहीं करती है जो उससे प्यार करते है। रिया माधव से कहती हैं कि वह उसकी हाफ गर्लफ्रेंड है लेकिन इसका सही अर्थ वह समझने की परवाह नहीं करती है।

फिल्म के मुख्य कलाकारों के साथ साथ दर्शक भी इस उलझन में ही दिखाई देते है। दर्शक बाहर निकलते समय इस उलझन में रहता है कि क्या उनको फिल्म देखने के लिए फर्स्ट शो में आना चाहिए था।



स्टार एक्टिंग रिव्यू : अर्जुन कपूर फिल्म को चलाने के लिए अपनी पूरी कोशिश करते हुए नजर आते है लेकिन वह इसमें कामयाब नही होते है। वह अपने आप को एक्सप्रेस करने की समस्या से जूझते हुए नजर आते है। अर्जुन की परफॉरमेंस में बिहारी भाषा सबसे बड़ी रुकावट नजर आती है और शायद इसी वजह से अपनी भूमिका अच्छे से नही निभा पाए है।

श्रद्धा कपूर अपने रोल में ठीक रही है लेकिन वह अपनी टाँगे और जांघ को दिखाने की तुलना में और अधिक कर सकती थी। विक्रांत मासी ने अपने रोल से सभी को प्रभावित किया है, उन्होंने फिल्म में प्यार और परवाह करने वाले दोस्त की भूमिका निभाई है। रिया चक्रवर्ती कैमियो के रूप में अच्छा काम किया है। सीमा विश्वास की बात करें तो वह एक अच्छी एक्टर है लेकिन इस फिल्म में उनके लिए कुछ खास नही था करने के लिए।



डायरेक्शन और म्यूजिक रिव्यू : मोहित सूरी की इस फिल्म की स्टोरी और चरित्र दर्शकों से कनेक्ट नही हो सके है। फिल्म का स्क्रीन प्ले और एडिटिंग और अधिक बेहतरीन की जा सकती थी। ऐसा लगता है कि डायरेक्टर मोहित की इस फिल्म में कैमरे का काम बस इतना है कि वह हर हालत में श्रद्धा कपूर की जांघों को जरुर शूट करेगा। बड़ी संख्या में कैमरेमैन उनके चेहरे से अधिक टांगो पर ध्यान केंद्रित करते हुए नजर आते है।

प्रेम कहानी बिना गीतों के अधूरी होती है इसलिए गीतों के शामिल करने पर डायरेक्टर की रूचि को हम समझ सकते है लेकिन अधिकतर गीत फिल्म की निरंतरता को बाधित करते हैं। आशिकी 2, एक विलेन और कलयुग जैसी फिल्मों की स्टोरी और गीत देखकर कही भी ऐसा महसूस नही होता है कि यह मोहित की फिल्म है।



अरिजीत सिंह एक बेहतरीन गायक है और उनकी आवाज का जादू इस फिल्म के गीत मै फिर भी तुम्हें चाहूँगा में नजर आता है। रिया सोमानी, जो न्यूयॉर्क में लाइव गायक बनने की इच्छा रखती है वह भी दुर्भाग्य से केवल एक गाना ही जानती है। स्टे ए लिटल लोंगर को यह हिंदी में भी गाती है लेकिन यह गीत अजीब लगता है, ऐसा महसूस होता है कि जैसे यह गीत बिल्कुल आवश्यक नहीं था।

बारिश' और 'तू ही हैं फिल्म के कुछ अन्य बेहतरीन गीत है।



फिल्म की सिनेमेटोग्राफी अच्छी रही है। फिल्म की स्क्रिप्ट कमजोर होने की वजह से डायरेक्टर के पास कुछ खास नही था करने के लिए। फिल्म के डायलॉग्स और रोमांस में कुछ नयापन नही है। 2 घंटा 15 मिनट तक डायरेक्टर साहब की इस फिल्म को दर्शकों ने कैसे झेला है यह तो उनकी आत्मा ही जानती होगी।

यदि आप इस फिल्म को अपनी फुल गर्लफ्रेंड के साथ देखने की प्लानिंग कर रहे है तो हमारा सुझाव है कि आप रेस्टोरेंट, कैफे या फिर स्पा के लिए उसे ले जाएं यकीन मानिए वह फिल्म देखने से अधिक खुश होगी।

हाफ गर्लफ्रेंड फिल्म वीडियो

        

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