जॉली एलएलबी 2 फिल्म वॉलपेपर

जॉली एलएलबी 2

जॉली एलएलबी 2 सेलिब्रिटीज

Akshay Kumar , Huma Qureshi, Annu Kapoor


जॉली एलएलबी 2 रिव्यू : अक्षय कुमार-अन्नू कपूर और सौरभ शुक्ला के अदालती नाटक की आलोचक भी करेंगे तारीफ़



जॉली एलएलबी 2 शोर्ट रिव्यू

जॉली एलएलबी 2 की स्टार कास्ट : अक्षय कुमार, हुमा कुरैशी, सयानी गुप्ता, अन्नू कपूर, सौरभ शुक्ला

डायरेक्टर : सुभाष कपूर



जॉली एलएलबी 2 फिल्म में क्या अच्छा है : जॉली एलएलबी 2 के डायलॉग तेज और दमदार है साथ में फिल्म की मजबूत स्टार कास्ट इस फिल्म को गजब की फिल्म बना देती है। फिल्म में एक भी क्षण ऐसा नही आता है जब आप खुद को सुस्त महसूस करें।

जॉली एलएलबी 2 फिल्म में क्या बुरा है : फिल्म का दूसरा भाग अधिक ड्रामा होने के कारण थोड़ी देर के लिए कुछ लोगो को बोर लग सकती है।



जॉली एलएलबी 2 फिल्म क्यों देखें : अक्षय कुमार और जॉली एलएलबी दोनों प्रशंसकों को यह फिल्म संतुष्ट करती है। इस कॉमेडी फिल्म ने हंसी मजाक में गंभीर विषय को उठाने वाली अपनी इस थीम को कायम रखा है। जॉली एलएलबी 2 में कॉमेडी भावना के साथ न्यायपालिका प्रणाली पर कुछ गंभीर कमेंट्री की गयी है जिसे आपको जरुर देखना चाहिए।

जॉली एलएलबी 2 फिल्म क्यों नही देखे : इस सप्ताह कोई अन्य बड़े स्टार की फिल्म रिलीज नही हो रही है इसके अतरिक्त भारतीय न्याय प्रणाली पर चोट करने वाली यह अच्छी फिल्म है इसलिए इसके ना देखने की कोई वजह हमारे पास नही है।



जॉली एलएलबी 2 फिल्म की पूरी समीक्षा :

जॉली एलएलबी 2 फिल्म की पूरी कहानी : जगदीश्वर मिश्रा उर्फ जॉली (अक्षय कुमार) एक संघर्षरत वकील है। व्यक्तिगत रूप से छोटे मामलों को लेकर वह लखनऊ में बड़े समय से एक वकील के नीचे प्रैक्टिस कर रहा है। जॉली के घर में उसकी पत्नी पुष्पा (हुमा कुरैशी) को पीने के बुरी लत है लेकिन वह अपने पति को हरदम सपोर्ट करती है।



हिना के (सयानी गुप्ता) के मामले के साथ खिलवाड़ के बाद गलती से जॉली की अंतरात्मा की आवाज जाग जाती है और वह उसे न्याय दिलाने का फैसला करता है। जगदीश्वर के सामने थापित वकील, माथुर (अन्नू कपूर) खड़े होते है और मुकदमा सुंदर लाल त्रिपाठी (सौरभ शुक्ला) की अदालत के लड़ा जाता है। आतंकवाद, भ्रष्टाचार और फर्जी मुठभेड़ों के इर्द-गिर्द घूमता यह कठिन मुकदमा जॉली के लिए काफी मुसीबतें ले आता है।




जॉली सच्चाई का पता लगाने में सक्षम होता है या नही होता है यह देखने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना है।

स्क्रिप्ट रिव्यू : सुभाष कपूर जब जॉली एलएलबी को पेश करके सबको हैरान कर दिया था। उनकी पहली फिल्म को अपार प्रशंसा मिली जिसके बाद अब पार्ट 2 को लेकर फैंस की उम्मीदें काफी बढ़ गयी है। दर्शको की उम्मीद पर खरा उतरने के लिए डायरेक्टर सुभाष ने इस बार गंभीर विषय को मजेदार प्रसंग के रूप में पेश किया है।



आतंकवाद और भ्रष्टाचार के इर्द-गिर्द घूमती इस स्क्रिप्ट को साजिश को मनोरंजन रूप देने के लिए सुभाष तारीफ़ की हकदार है। फिल्म के संवाद विचित्र और बेहतरीन रहे है। स्क्रिप्ट के दूसरे भाग का भावनात्मक रूप से लिखे डायलॉग को हजम करन कई दृश्यों में मुश्किल लगता है।



अदालत दृश्यों को बहुत ही अच्छे तरीके से लिखा गया है। मनीष मल्होत्रा लहंगा न्यायधीश की बेटी पार्टी वाले अनावश्यक हिस्से को भूल जाएं तो बाकी दृश्य कमाल के है। जॉली के छोटे मामलों का विवरण नही दिखाया गया और ना ही स्क्रिप्ट में उनकी तैयारीयों का विवरण दिखाया गया है।



सुभाष कपूर की स्क्रिप्ट में जगदीश्वर मिश्रा वकील आपको फिल्म बावरा मन टाइप रोमांस करता हुआ नजर आएगा। भारतीय न्यायपालिका के चित्रण मुख्य रूप से निजली अदालत की प्रगति को बहुत सही तरीके से दर्शको के सामने रखा गया है। कपूर ने भारतीय न्यायपालिका में लंबित पड़े मुकदमों के आंकड़ों को और भारतीय वकीलों पर की गयी तेज बातचीत अपना प्रभाव दर्शको में मन पर छोडती है।

कपूर एक बार फिर से मुश्किल से टकराने और यथार्थवाद का मिश्रण को सफल बनाने में कामयाब हो गए है। सुभाष कपूर की इस स्क्रिप्ट को एक हिट स्क्रिप्ट कहा जा सकता है।



स्टार परफॉरमेंस : अक्षय कुमार जौली की भूमिका में अच्छे लगे है। वह इस साज़िश और न्याय को गंभीरता से लेने वाले फनी वकील के चरित्र में पूरी तरह फिट बैठते है। अन्नू कपूर के चरित्र के साथ अदालत में बहस करने वाले सभी विशेष दृश्यों में काफी अच्छे लगे है।



सौरभ शुक्ला की स्टार कास्ट की सबसे बेहतरीन बात न्यायाधीश सुंदर लाल त्रिपाठी है। उनकी जज एक्टिंग की तुलना नही की जा सकती है। आप उनको बड़ी आसानी से गुलाबों गीत पर नृत्य की तरह नासमझ बातें करते देखते हैं।



माथुर के रूप में अन्नू कपूर एक सच्चे लखनवी वकील के रूप में ही नजर आते है उनहोंने फिल्म में बहुत ही अच्छा काम किया है। हुमा कुरैशी जॉली की पत्नी पुष्पा के रोल में समान्य रही है। सयानी गुप्ता दमदार कैमियो किया है। दो दृश्यों में वह मजबूत प्रभाव छोड़ती है। कुमुद मिश्रा नकारात्मक भूमिका को अच्छे से निभाया है।

इनामुलहक छोटा सा कैमियो फिल्म में दिलचस्प मोड़ लाता है।



जॉली एलएलबी 2 डायरेक्शन रिव्यू : सुभाष कपूर ने इस फिल्म में कई विभागों को संभाला है, उन्होंने स्टोरी डायरेक्शन और स्क्रीनप्ले के रूप में इस फिल्म को संभाला है। फिल्म की इस कहानी को डायरेक्टर ने शक्तिशाली संवादों से भर रखा है। फिल्म के प्रमुख डायलॉग की बात करें तो इसमें किसान चीखे मार रहा है, सूखी टहनी है, हरी पट्टी लगा दीजिए जैसे कई डायलॉग है जिनको हम आपके लिए नीचे लिख रहे है।

* घूँघट इलेवन बनाम बुर्का इलेवन प्रीमियर लीग बनारस में हो रहा है
* भरे कोर्ट में थप्पड़ मार दिया है, अब क्या आरडीएक्स लगाने का इरादा है
* यह कश्मीर है, यहाँ जेल जाना सिम कार्ड खरीदने से ज़्यादा आसान है'

बेहतरीन डायलॉग के आलावा डायरेक्टर ने कोर्ट रूम और वकीलों की भाषा पर खास ध्यान दिया है। वकीलों के दृश्य कही से बॉलीवुड फ़िल्मी नही लगते है ऐसा लगता है सामने रियल आदलत का दृश्य है।



अदालत की बुरी लाइट व्यवस्था की स्थिति पर 50 लाख के लिए एक गोल्ड पैकेज का मतलब क्लीन चिट, इस छोटे शक्तिशाली दृश्य का डायरेक्शन कपूर ने बड़ी चतुराई से किया है।

फिल्म के संगीत की बात करें .बावरा मन सुंदर ट्रैक है लेकिन फिल्म के दौरान आने पर आपको खीझ होती है। बाकी फिल्म के गीत और संगीत समान्य है।



जॉली एलएलबी 2 एक अच्छी मनोरंजक फिल्म है। सौरभ शुक्ला एक गजब के डायरेक्टर है उन्होंने अक्षय को एक अच्छा रूप दिया है।

जॉली एलएलबी 2 फिल्म वीडियो

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