कपूर एंड संस फिल्म वॉलपेपर

कपूर एंड संस सेलिब्रिटीज

Alia Bhatt , Sidharth Malhotra , Fawad Khan , Sonakshi Sinha , Abhishek Bachchan , Rishi Kapoor



मजबूत प्रदर्शन,आकर्षक पात्रों के अतिरिक्त गहराई और तीक्ष्णता की कमी से सजी फिल्म है कपूर एंड संस



कपूर एंड संस फिल्म का शोर्ट रिव्यू


स्टार कास्ट : आलिया भट्ट, सिद्धार्थ मल्होत्रा, फवाद खान, ऋषि कपूर, रत्ना पाठक शाह, रजत कपूर


निर्देशक : शकुन बत्रा



कपूर एंड संस फिल्म की अच्छी बात : शकुन बत्रा की यह एक प्यारी फिल्म है और उनकी खासियत यह है कि परिवार क्षणों पर शानदार ढंग से कब्जा कर उनको जीवंत कर देते है। शकुन बत्रा ने इस फिल्म में दुखों सुखों और परेशानियों का चित्रण बहुत अच्छे तरीके से किया है। कपूर एंड संस फिल्म की बुरी बात : कपूर एंड संस फिल्म की सबसे बुरी बात यह है कि लेखकों ने ज्यादा ही भावनात्मक रूप देने की कोशिश कर दी है जिसका बोझ फिल्म की कड़ी को कमजोर बनाता है। कपूर एंड संस फिल्म में जब हास्य की बात आती है तो फिर लेखकों ने ऐसा ही किया है।


फिल्म क्यों देखें : युवाओं के लिए बनी कपूर एंड संस फिल्म में भावनात्मक परिवार नाटकों की बात हुई है इसलिए फिल्म जीवन का एक टुकड़ा है जिसे एक बार तो देखा जा सकता है।


फिल्म क्या न देखें : आलिया,फवाद और सिद्धार्थ मल्होत्रा की जोड़ी से अधिक उम्मीदें लगा रखी है तो आप निराश ही होंगे।


कपूर एंड संस फिल्म की पूरी समीक्षा


कपूर एंड संस फिल्म की पूरी कहानी : राहुल (फवाद खान) और अर्जुन (सिद्धार्थ मल्होत्रा) क्रमशः लंदन और न्यू जर्सी से है और उनके माता-पिता हर्ष (रजत कपूर) सुनीता (रत्ना पाठक शाह) और दादू (ऋषि कपूर) जो कुन्नूर में बसे हुए हैं उन पर आधारित हैं। फिल्म की स्टोरी में दादू को दिल का दौरा पड़ता है जिसके बाद राहुल और अर्जुन अपने गृहनगर की ओर भागते हैं। दादू एक खुशनुमा भाग्यशाली चरित्र है जबकि हर्ष और सुनीता के बीच तनाव है और उनकी शादी संघर्ष कर रही है। इस बीच राहुल और अर्जुन के बीच कुछ अस्थिर मुद्दे आते है जब दोनों साथ में रहना शुरू कर देते है लेकिन वह भी समय के साथ सुलझते रहते है।


इससे पहले उनके रिश्ते तनावपूर्ण होकर और अतिरिक्त तनाव पैदा करें दोनों भाइयों का अनजाने में तिया (आलिया भट्ट) नाम की लड़की से लिंक बन जाता है। दोनों व्यक्तिगत रूप से तिया के साथ जुड़ते हुए उतार चढ़ाव का सामना करते है। कपूर एंड संस के सुखी परिवार तस्वीर क्या होगी यही जाननें के लिए आपको थिएटर तक जाना है।


कपूर और संस फिल्म की स्क्रिप्ट विश्लेषण : कपूर और संस का जब ट्रेलर आउट हुआ था तभी से कायस लगाए जा रहे थे कि दिल धड़कने दो की बेकार परिवार फिल्म को दो भाई और एक लड़की का विषय बना कर फिर से इस्तेमाल किया जाएगा लेकिन सौभाग्य से, शकुन बत्रा और आयशा ने लेखन के दौरान उस त्रुटिपूर्ण फिल्म की जगह परिवार पर शानदार ढंग से स्क्रिप्ट लिखी है। फिल्म की स्क्रिप्ट में दृश्य, चरित्र संवादों की बारीकियों की कनेक्टिविटी पर खास ध्यान दिया गया है।


लेखकों स्थितियों के कारण उत्पन्न भाईयों में प्रतिद्वंद्विता को बड़े ने सूक्ष्म तरीके और बड़ी आसानी से व्यक्त कर दिया है जो अक्सर परिवारों में छोटे भाई-बहनों को 'गैर जिम्मेदाराना' होने के लिए चिह्नित करते है। भारतीय परिवारों में करीबी बांड हो सकता था लेकिन वह दिखाने में वह असफल रहे है।


दादू का किरदार दर्शकों को खुश करने के लिए लिखा है। शुरू में दादू को अश्लील देख सिनेमाघर में मूवी देखने आये लोगो को काफी प्रफुल्लित करता है लेकिन एक बिंदू पर आकर ऐसा प्रतीत होता है की दादू को शरारत के लिए मजबूर किया जा रहा है। दादू के चरित्र को और बेहतर किया जा सकता था।


फिल्म में टिया का कम उम्र में माता-पिता को खो देना और अकेले बच्चे का स्वभाव अतीत पर विचार देखना थोडा अजीब लगता है। स्क्रिप्ट के दूसरे भाग में जब रहस्योद्घाटन का समय आता है प्रत्येक सदस्य को अपनी गलतियों के बारे में साफ-साफ बाहर करता हुआ नजर आता है इसके अतिरिक्त दूसरे भाग में कुछ खास नही है।


कपूर और संस फिल्म में एक्टिंग : फिल्म विशेष रूप से किसी एक कलाकार पर आधारित नही है। फिल्म में फवाद खान का प्रदर्शन ताली की हकदार है। राहुल, एक संवेदनशील, प्यारा और परफेक्ट साधारण बेटे के रोल को बखूबी निभाया है। सिनेमाघरों में लड़कियों का झुंड उनकी मुस्कान देखने की मांग बार-बार करती नजर आती है क्योकि उनका प्रदर्शन देखकर आपका दिल रोने की तरफ इशारा करता है। फवाद खान ने राहुल के रोल को बहुत अच्छे से निभाया है।


राहुल के छोटे भाई अर्जुन बने सिद्धार्थ मल्होत्रा एक्टिंग के लिहाज से औसत रहा है। फिल्म में सिद्धार्थ की लुक तो काफी शानदार रही है लेकिन एक्टिंग में वह अपने बॉडी चमक के आगे विफल होते ही नजर आते है। फिल्म के एकमात्र अभिनेत्री आलिया भट्ट तिया के रूप में काफी हैरान करती है। चुलबुली और कभी-कभी भावुक चरित्र को उन्होंने परदे पर उतारने में कोई कसर नही छोड़ी है। फिल्म में अलिया भट्ट की लूकिंग और ड्रेसिंग स्टाइल काफी बेहतरीन रहा है।


रजत कपूर और रत्ना पाठक शाह पति पत्नी की भूमिका में एकदम सही रहे है। अपने हनीमून को याद करते हुए इस जोड़ी ने अपने चेहरे पर जो मुस्कान लाई है वह देखने में काफी अच्छी लगती है। कृत्रिम मेकअप से रूप बदलकर फिल्म में एक तरह की अहम भूमिका निभाने वाले ऋषि कपूर भावनात्मक रूप से और अपनी हरकतों से दर्शको के मन में दादू रोल के लिए प्यार पैदा किया है।


डायरेक्शन : शकुन बत्रा की पिछली फिल्म एक मै और एक तू थी वह फिल्म अधिकतर लोगो को पसंद नही आई थी और ना ही वह लोगो की नजर में आये थे लेकिन पिछले बातों को भूल इस बार करण जौहर के प्रसिद्ध भावनाओं को लेकर लोगो की आँखों में बसने का प्रयास किया है।


फिल्म के पहले भाग में पात्रों के पेश करने का उनका तरीका बड़ा आसान रहा है। इसके अतिरिक्त कुन्नूर शहर का चुनाव डायरेक्शन की लिहाज से एक अद्भुत विचार है।शहर के ताजगी मौसम ,रहने वाले कमरें ,रसोई को डायरेक्टर ने इस अंदाज में दिखाया है की सभी कुछ प्राकृतिक और यथार्थवादी लगे है। शकुन बत्रा ने साबित कर दिया है कि फैंसी कलाकारों के प्रदर्शन के लिए फैंसी घरों की जरूरत नहीं है।


फिल्म के दूसरी छमाही को और अधिक बेहतर किया जा सकता था लेकिन दो हिस्सों में बनी इस फिल्म में दर्शक दूसरे हिस्से को वह प्यार नही दे पायें है जो इसे अर्जित करना चाहिए था।


संगीत : फिल्म का संगीत और गीत क्रियात्मक है फिल्म में कुछ गीत कर गयी चुल्ल और लेट्स नाचो पहले ही धमाल कर चुके है। इसके अतिरिक्त फिल्म का कोई गीत यादगार नही है। भावनात्मक दृश्य के समय भी संगीत कुछ खास नही लगा है।


कपूर और संस एक आधुनिक जमाने के पारिवारिक नाटक है जिसमें हंसी और रोना और मुस्कान को माध्यम बना कर एक भावनात्मक स्टोरी देने का प्रयास किया गया है जो उतना सफल नही हो पाया है।

कपूर एंड संस फिल्म वीडियो

        

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