मांझी-द माउंटेन मैन फिल्म वॉलपेपर

मांझी-द माउंटेन मैन सेलिब्रिटीज

Nawazuddin Siddiqui , Radhika Apte


नवाजुद्दीन सिद्दीकी एक चमत्कारिक एक्टिंग की कहानी है मांझी: द माउंटेन मैन



बायोपिक फिल्म बनाने में महारत हासिल करने वाले केतन मेहता ने एक बार फिर से असल जिन्दगी को मांझी: द माउंटेन मैन के रूप में फ़िल्मी पर्दे पर उतारने की कोशिश की है। मांझी: द माउंटेन मैन के जरिए उन्होंने दुनिया के सामने बिहार गया जिले के अमेठी गांव के आम आदमी दशरथ मांझी के प्रेरणादायी जीवन को बाखूबी पेश किया है। आपको बता दे केतन मेहता इससे पहले असल जिन्दगी से प्रभावित मंगल पाण्डे और सरदार जैसी बायोपिक फिल्म बना चुके है।





मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म की कहानी : बिहार के दशरथ मांझी के बारे में इतना कुछ मिडिया में लिखा और दिखाया जा चुका है कि उनके जीवन की कहानी किसी से छुपी नही है। मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म में दशरथ मांझी के रोल में नवाजुद्दीन सिद्दीकी है। दशरथ मांझी आम आदमी की तरह अपने रोजाना जरूरतों को पूरा करने के लिए हर दिन प्रयास में लगा रहता है। दशरथ मांझी की एक पत्नी फगुनिया (राधिका आप्टे) है जिसके प्यार में मांझी पागल है। पति और पत्नी दोंनो ने गाँव से दूर पहाड़ी पर अपनी प्यार भरी दुनिया को बसा रखा है। दोनो का मिलकर सम्पूर्ण जीवन बिताने का सपना उस समय टूट जाता है जब फगुनिया पानी लेकर घर की तरफ जा रही होती है और अचानक उसका पैर स्लिप कर जाता है और वह पहाड़ी की उचाई से नीचे गिर जाती है। फगुनिया को मांझी बचाने का बहुत प्रयास करता है लेकिन पहाड़ से अस्पताल जाने का रास्ता कठिन और लंबा होने के कारण वह अपनी पत्नी को समय पर नही पंहुचा पाता है जिस कारण फगुनिया की मौत हो जाती है। फगुनिया की मौत के बाद मांझी के जीवन में क्रांति आती है और वह मजबूत इरादे हथौड़े और छेनी की मदद से पहाड चीर कर शहर जाने का रास्ता बनाने लगता है। 22 साल की कड़ी मेहनत के बाद मांझी के जीवन में वह दिन आता है जब वह रास्ता बनाने में सफल हो जाता है। उसकी इस सफलता को गाँव वाले अचंभित और दुनिया वाले सम्मान की नजर से देखते है इसी के साथ फिल्म की कहानी का अंत भी प्रेरणादायी और सुखद रूप से होता है।





मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म का डायरेक्शन: केतन मेहता ने मांझी: द माउंटेन मैन की कहानी को बहुत ही सरल और अच्छे तरीके से फिल्माया है। डायरेक्टर केतन ने इस फिल्म के लिए बिहार के पहाड़ो और गांव के लिए बिलकुल सही लोकेशन का चुनाव किया है जिसकी वजह से परदे पर चलती यह फिल्म बिलकुल रियल लगती है। केतन की सबसे अच्छी बात यह है कि वह फिल्म के लिए बिलकुल सही स्टारकास्ट का चुनाव करते है और उनकी इस खूबी की झलक इस फिल्म में भी दिखाई दी है।





मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म की एक्टिंग : मांझी के जीवन पर बनने वाली यह पूरी फिल्म का दारोमदार फिल्म कलाकारों के अभिनय पर ही टिका था जिसे फिल्म के हर एक्टर ने बहुत ही बेहतरीन ढंग से निभाया है।





फिल्म में मुख्य नायक नवाजुद्दीन ने दशरथ मांझी के जीवन के अलग-अलग पहलुओं को बेहतरीन रूप में पेश किया है। नवाजुद्दीन के गंभीर अभिनय से सभी वाकिफ है पर इस फिल्म में आपको नवाजुद्दीन की रोमांटिक झलक भी नजर आयेंगी। पत्नी से प्रेम करने के दृश्य हो या पहाड़ काटने वाले जज्बे का दृश्य हो नवाजुद्दीन ने फिल्म के हर सीन में अपनी एक्टिंग का लोहा एक बार फिर से मनवाया है। नवाजुद्दीन को फिल्म में देखकर यह अहसास ही नही होता है कि वह असली दशरथ मांझी नही है।





नवाजुद्दीन के अतिरिक्त फगुनिया के किरदार राधिका आप्टे ने काफी सुलझी हुई एक्टिंग का प्रदर्शन किया है। राधिका आप्टे फिल्म में पति को समर्पित साधारण और मेहनती स्त्री के रोल में बहुत ही बेहतरीन लगी है। राधिका आप्टे की सरल ख़ूबसूरती ने उनके अभिनय में चार चाँद लगा दिए है। फिल्म में नवाजुद्दीन और राधिका के अलावा तिग्मांशु धूलिया और पंकज त्रिपाठी ने भी अपने-अपने रोल को सही ढंग से निभाया है।





मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म का गीत संगीत : मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म में गीत संगीत रखा है जो इस फिल्म की कमजोर कड़ी है। साधारण आदमी की इस बायोपिक फिल्म में गीतों की अधिक आवश्यकता नही थी अगर यह फिल्म बिना गीतों के होती तो भी दर्शक इस फिल्म से उतना ही जुड़े रहते। फिल्म में जितने भी गीत डाले गए हैं उनमे से कोई भी गीत ऐसा नही है जिसे सिनेमाघर के बाहर सुनने का दिल करें। फिल्म के बीच में गीत आ जाने से दर्शक हल्का बोर महसूस करते है।





मांझी: द माउंटेन मैन फिल्म के डायलॉग : 124 मिनट वाली इस फिल्म के डायलॉग शानदार जबरजस्त जिंदाबाद है। फिल्म में जब तक तोड़ेंगे नही तब तक छोड़ेंगे नही , भगवान के भरोसे मत बैठियें क्या पता भगवान हमरे भारोसे बैठा हो जैसे तालियों वाले सवांद है। इ प्रेम है प्रेम में बहुत बल है जैसे अन्य काफी अच्छे डायलाग है जो दर्शको को जहन में अधिक समय तक रहेंगे।





क्यों देखें : प्रेरणा पाने व अच्छी परिवारिक फिल्म के साथ-साथ कलाकारों की अच्छी एक्टिंग देखने का मन हो तो आप यह फिल्म जरुर देखें।





क्यों ना देखें : अगर आपको बायोपिक फिल्मों की जगह एक्शन और बोल्ड सिनेमा पसंद है तो यह फिल्म आपके लिए नही है।























मांझी-द माउंटेन मैन फिल्म वीडियो

  

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