एनएच 10 फिल्म वॉलपेपर

एनएच 10

एनएच 10 सेलिब्रिटीज

Anushka Sharma , Neil Bhoopalam, Darshan Kumaar


एनएच 10 गाली गलौच और रोमांच से भरी मजबूत औरत की कहानी है।



फिल्म की कहानी : एनएच 10 नवदीप सिंह द्वारा निर्देशित एक थ्रिलर फिल्म है जिसमे अनुष्का शर्मा मीरा के रोल में और उनके पति अर्जुन के किरदार में नील भूपलम है। मीरा अपने पति अर्जुन के साथ गुड़गांव में रहती है और ये दोनों कामकाजी दम्पंती है। एक रात जब मीरा अकेले ड्राइविंग करते हुए पार्टी से घर आ रही होती है तो उसके ऊपर सुनसान सड़क पर कुछ अज्ञात लोग हमला कर देते है और यहाँ वह जैसे-तैसे अनुष्का बचती है। इसके बाद मीरा हमले की शिकायत पुलिस से करती है और पुलिस छानबीन करती है। पुलिस को इस छानबीन में कुछ भी पता नही चलता है। इसके बाद अर्जुन अपनी बीवी के सामने उस रात साथ नहीं होने के लिए खुद को दोष देता है और बीवी मीरा का जन्मदिन मनाने के लिए शानदार रेगिस्तान को चुनता है जिसके लिए दोनों दम्पंती छुट्टीयों पर निकल पड़ते है।


 छुट्टीयों पर निकले दोनों विवाहित जोड़े रास्ते भर की मुसीबतों का सामना करते हुए आगे बढ़ते रहते है और कुछ देर बाद खाना खाने के लिए एक ढाबे पर रुकते है जहा से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है। यह पर उनकी मुलाकात एक प्रेमी जोड़े से होती है जो मुसीबतों से घिरा पड़ा है। आप को बता दे इसी ढाबे से दर्शन कुमार की फिल्म में सतवीर नाम से एंट्री होती है जो उस प्रेमी जोड़े का दुश्मन है। सतबीर सरेआम इस ढाबे पर प्रेमी जोड़े को मारने लगता है जो बात ढाबे पर हाजिर हीरो को पसंद नही आती है और हीरो सतबीर का विरोध करता है। जिसके कारण ढाबे पर सतबीर की हीरो अर्जुन से मारपीट भी होती है। इस मारपीट में गुंडा सतबीर लड़की को ले जाने में कामयाब हो जाता है इस सीन के बाद अर्जुन सतबीर का पीछा करता है जहा उसे आगे पता चलता है कि उस लड़की को मारने वाले गुंडे कोई और नही बलिक सभी लड़की पिंकी के परिवार के लोग ही है यहाँ से फिल्म ओनर किलिंग को कटु सत्य को दर्शाने लगती है।



यही से फिल्म में सतबीर और अर्जुन की लड़ाई शुरू हो जाती है पर अर्जुन सभी खतरों का सामना करने में नकामयाब हो जाता है और इस नाकामयाबी की कीमत उसे अपनी जान से चुकानी पड़ती है हीरो की मौत के बाद प्रेमी जोड़े के साथ हुई नाइंसाफी और अपनी पति के मौत के बदले की जिम्मेदारी मीरा पर आ जाती है जिसे मीरा बखूबी निभाती है वह गुंडों से अकेले लड़ कर उन पर जीत हासिल करती है और अंत में सारे दुखों को एक सिगरेट के कश के साथ भुलाती नजर आती है।


एक्शन : फिल्म के एक्शन काफी रियल और अच्छे रखे गये है। फिल्म में लोहे की रॉड और आम प्रयोग में आने वाली चीजों को हथियार के रूप में दिखाने की वजह से फिल्म के एक्शन काफी रियल लगते है।



डायलॉग्स : फिल्म के डायलॉग्स ठीक-ठाक है। आपकी डेमोक्रेसी न गुडगाँव के आखरी मॉल पे खत्म हो जाती है। "यहां बिजली पानी तो पोंहचा नहीं, कंस्टीटूशन क्या खाक पहुचेगा" फिल्म में सबसे बेहतर डायलॉग्स यही है इनके अलावा कुछ बीप वाले शब्द भी अच्छे चुन कर डाले है जो लोगो को पसंद आ सकते है।


एक्टिंग : पूरी फिल्म अनुष्का शर्मा के ऊपर है जिसे अनुष्का ने बखूबी निभाया है। इसके अलावा पूरी की पूरी फिल्म में सबसे काबिलेतारीफ़ एक्टिंग दर्शन कुमार ने की है फिल्म में इन दोनों के अलावा फिल्म के किरदारों में नील भूपलम,दीप्ति नवल ने ठीक-ठाक एक्टिंग की है।


गीत संगीत : एनएच 10 एक एक्शन फिल्म है इसलिए इसमे गीत संगीत की ज्यादा अच्छा नही या यु कह ले कि गीत संगीत ना के बराबर ही है। फिल्म में लगभग नौ गीत है पर कोई ऐसा नही है जिसे आप गुनगुना सके।


कहानी का पोस्टमार्टम : इस फिल्म की कहानी सुदीप शर्मा ने लिखी ,फिल्म की कहानी ठीक ठाक है। इस कहानी में एक्शन थ्रिलर ड्रामा ,पारिवारिक और समाजिक कलह सब कुछ है। फिल्म की इस कहानी में ऑनर किलिंग के मामले को उठाने के साथ-साथ महिला सस्क्तिकरण के तहत एक मजबूत महिला का भी प्रदशर्न किया गया है। इनके अलावा फिल्म की कहानी प्रेम के प्रति पुराने नजरिये और पुरानी सोच रखने वाले लोगो पर गहरी चोट करती है।



कहानी का सच्चा पक्ष : कहानी का सबसे बड़ा सच्चा पक्ष ये है कि आज भी समाज में औरतो और प्रेम करने वाले लोगों से हीन भावना रखी जाती है इसके अलावा कहानी का सच्चाई लगने वाला पक्ष ये है कि अगर आप बिना सोचे समझे किसी में मामले में ऊँगली करते है तो आप को इसका खामियाजा अपनी जान से भी चुकाना पड़ सकता है और दूसरा सच्चा लगने वाला पक्ष ये है कि अगर कोई औरत अपने पर आ जाये तो उस औरत से मजबूत कोई और नही हो सकता है।



कहानी का कनफ़्युजन पक्ष : कहानी की सबसे बड़ी चूक वही है जहाँ से फिल्म की असली कहानी शुरू होती है फिल्म की असली कहानी ढाबे से शुरू होती है जहाँ हीरो और खलनायक का टकराव होता है। इस टकराव में खलनायक दर्शन कुमार एक लड़की जिसका नाम पिंकी है उसके सरेआम मारता है तो ज्यादातर हिंदी फिल्मों की तरह हीरो नील भूपलम उसको बचाने के लिए आता है। कहानी में कनफ़्युजन ये है कि खलनायक दर्शन कुमार नील भूपलम को बताता है कि वह जिसे मार रहा है वह कोई और नही उसकी अपनी बहन है। उसके ये बताने के बावजूद भी हीरो लड़ने जाता है। हीरो का ये कदम सच्चाई से काफी दूर नजर आता है क्योकि सामने वाले और उसके पारिवारिक मामले में आप बिना कुछ जाने कैसे बोल सकते है और वो भी तब जब ढाबे में मौजूद कोई आदमी कुछ भी बोलने को तैयार न हो।


 कहानी का दूसरा कनफ़्युजन पक्ष ये है कि इस कहानी में हीरो खतरनाक जगहों पर अपनी पत्नी को छोड़ कर चला जाता है कहानी की बात भी शायद लोगो को हजम हो।


कहानी का तीसरा कनफ़्युजन पक्ष : कहानी का तीसरा कनफ़्युजन पक्ष ये है की कहानी में पुलिस तो रखी गयी है पर न्याय नही और कहानी में न्याय एक पुलिस वाले के मौत पर भी नही जागता। समूचा पुलिस तंत्र इस फिल्म में लाचार दिखता है।


एनएच 10 की कहानी में लोग अचानक तथा बेमतलब ही एक दुसरे से जुड़ते और बिछुड़ते जाते है क्योकि कहानी हाईवे के एक सफर के ऊपर लिखी गयी है इसलिए कहानी में किरदारों के बिना मतलब के एक दुसरे से उलझने के लिए आप कहानीकार को कुछ नही कह सकते।


कहानी का अच्छा पक्ष : कहानी का पहला अच्छा पक्ष ये है औरत की मदद के लिए हीरो बिना कुछ सोच समझे कूद जाता है और दूसरा अच्छा पक्ष की औरत के खिलाफ हीन भावना रखने वाले लोगो का अंत भी एक औरत के हाथ ही होता है।


डायरेक्टर साहब चूक गये : फिल्म को डायरेक्ट करते हुए नवदीप सिंह कही-कही छोटे-छोटे दृश्य को दिखने में चूक गये है जिस वजह से फिल्म सच्चाई से कोसो दूर नजर आने लगती है। फिल्म में चूक की शुरुवात फिल्म की शुरू होने के महज कुछ क्षण बाद ही शुरू हो जाती है।


चूक नंबर 1 : फिल्म के एक दृश्य में डायरेक्टर साहब ने दिखाया है कि रात को एक लड़की सुनसान सडक पर एफएम का चैनल खोज रही है जबकि रियल लाइफ में लोग ये काम गाडी चलाते हुए ही कर लेते है और कम से कम इस छोटे काम के लिए रात को सुनसान सडक के बीच में गाड़ी नही खड़ी करते।


चूक नंबर 2 : फिल्म की दूसरी सबसे बड़ी चुक उस दृश्य में है जिसमे हीरो और हेरोइन रास्ता पूछने के लिए गाड़ी दूर खड़ी करके पैदल जाते है जबकि असल में लोग कार से निचे उतरने बिना शीशा नीचे करके रास्ता पूछते है।


चूक नंबर 3 : फिल्म में डायरेक्टर से सबसे बड़ी चुक उस दृश्य में होती है जब नील भूपलम के सिर पर फाइट करते हुए चोट लगती है। इस चलते फाइट सीन में रॉड लगते ही डायरेक्टर ने हीरो के सिर का खून सुखा दिखाया है जिसे डायरेक्टर साहब की सबसे बड़ी गलती कहा जा सकता है।



चूक नंबर 4 : डायरेक्टर साहब ने ऑनर किलिंग के जो तरीके अपनाए है वह भी सच्चाई से कोसो दूर है। वैसे डायरेक्टर साहब को ऑनर किलिंग दिखने से पहले एक बार क्राइम पेट्रोल के ऑनर किलिंग एपिसोडस देख लेने चाहिए थे उससे उनको काफी मदद मिल सकती थी।


चूक नंबर 5 : डायरेक्टर साहब ने गाँव में जितने भी फाइट सीन दिखाए उन सभी फाइट दृश्यों में वह गाँव के आम लोगो को दिखाना भूल गये। डायरेक्टर जी ने गाँव तो बड़े-बड़े दिखाए पर फाइट सीन में गाँव के आम लोगो को दिखाना भूल गये।





फिल्म देखने पर वेबसाइट का रिव्यू : इस वीक इसके मुकाबले कोई अच्छी फिल्म नही लगी है इसलिए इस फिल्म को आप सिर्फ एक बार ही देखने के लिए चुन सकते है इसके बाद दुबारा आप ये जहमत नही उठा पाएंगे। अगर आप को मारपीट गाली-गलौच रोमांच पसंद है तो भी आप इस फिल्म को चुन सकते है इनके अलावा आप दर्शन कुमार और अनुष्का शर्मा की एक्टिंग की वजह से भी इस फिल्म को देखने का मन बना सकते है।

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