नाम शबाना फिल्म वॉलपेपर

नाम शबाना सेलिब्रिटीज

Akshay Kumar , Taapsee Pannu , Manoj Bajpayee, Anupam Kher, Danny Denzongpa, Shivam Nair


तापसी पन्नू दमदार, बहुत सारी जासूसी लेकिन लेकिन स्क्रिप्ट कमजोर



नाम शबाना फिल्म की स्टार कास्ट : तापसी पन्नू, अक्षय कुमार, मनोज बाजपेई, अनुपम खेर और पृथ्वीराज सुकुमारन

नाम शबाना फिल्म के डायरेक्टर : शिवम नायर

नाम शबाना फिल्म में अच्छा क्या है : नाम शबाना हिंदी मूवी में सिर्फ दो बातें बहुत अच्छी है एक तो फिल्म का एक्शन और दूसरा तापसी पन्नू।

नाम शबाना फिल्म में बुरा क्या है : फिल्म की सबसे बुरी बात जो दर्शकों के सिरदर्द का कारण बनती नजर आती है वह है फिल्म के गीत और उनकी गलत समय पर एंट्री, फिल्म के गीतों के अतरिक्त फिल्म बेबी की तरह स्क्रीन पर स्क्रिप्ट कसी हुई नजर नही आती है जो इस फिल्म को कमजोर करती है इसके अतरिक्त इस हिंदी फिल्म के डायलॉग भी दमदार नही है।



नाम शबाना फिल्म क्यों देखे : अगर आप पारंपरिक भारतीय नारी वाली कई फ़िल्में और नाटक देख कर उब चुके है तो आधुनिक भारतीय लड़की जो बॉन्ड स्टाइल में देश के लिए एक्शन कर जोखिम लेती और उसमे कामयाब भी होती है देखने का अच्छा मौका है। इसके अतरिक्त अगर देश के लिहाज से देखे तो आज जब कई युवा भटक आईएसआईएस में भर्ती होने के लिए जा रहे है ऐसे में नाम शबाना फिल्म युवाओं में देशभक्ति की भावना पैदा करने का प्रयास करती नजर आती है।

नाम शबाना फिल्म क्यों ना देखे : इस फिल्म की तुलना अगर आप इसके पहले पार्ट बेबी से करते हुए सिनेमाघर पहुंचे है तो आपको निराशा ही हाथ लगेगी।



पूरा रिव्यू :

नाम शबाना फिल्म की पूरी कहानी : 2 घंटे 28 मिनट की इस फिल्म को बेबी फेम नीरज पांडे ने लिखा है। काहानी की शुरुआत वियाना ऑस्ट्रिया से होते हुए मुम्बई गोवा और मलेशिया तक जाती है। फिल्म के शुरू में बताया जाता है कि दो भारतीय जासूसों की हत्या हो गयी है उसके बाद कहानी सीधा फिल्म की मुख्य नायिका शबाना खान (तापसी पन्नू) से शुरू हो जाती है।

शबाना खान मुंबई में अपनी माँ के साथ एक आम जिंदगी जी रही है और फ़्लैश बैक में जाकर बताती है कि कैसे उसके पत्थर दिल को जय (तेहर शब्बीर) नाम का युवा पिघलता है और कॉलेज के दिनों में उससे उसको प्यार हो गया था लेकिन कहानी में मोड़ आता है और शबाना छेड़छाड़ का शिकार होती है जिसमे उसके बॉयफ्रेंड जय की मौत हो जाती है। जय के लिए जब स्ट्रोंग लड़की शबाना इंसाफ के लिए निकलती है तभी उसे सीक्रेट एजेंसी से कॉल आता है और उसे स्पेशल टास्क फोर्स के हेड (मनोज बाजपेयी) द्वारा विस्वास दिलाया जाता है कि अगर वह एजेंसी में शामिल होती है तो उसके बॉयफ्रेंड को न्याय दिलाने में एजेंसी पूरी मदद करेगी।



शबाना एजेंसी ज्वाइन कर लेती है और पहले कार्यकाल में जय के हत्यारों को खत्म करने में सफल होने के बाद उसे नए मिशन के तहत अजय राजपूत (अक्षय कुमार) के साथ काम करने का मौका मिलता है इन दोनों के साथ शुक्ला (अनुपम खेर) मलेशिया के डॉन टोनी (पृथ्वीराज सुकुमारन) को खत्म करके उसके अवैध हथियारों और तस्करी के करोबार पर लगाम लगाते है।

स्क्रिप्ट रिव्यू : फिल्म की स्क्रिप्ट स्क्रीन पर उतनी कसी हुई नजर नही आती है। लेखक नीरज पांडे ने नाम शबाना फिल्म के लिए एक बेहद कमजोर स्क्रिप्ट लिखी है इसका पहला भाग काफी धीमा रखा गया है अगर फिल्म की रफ्तार को थोडा तेज रखा जाता है तो दर्शकों के साथ फिल्म और अच्छा कनेक्ट कर सकती थी। एजेंसी में उसकी भर्ती तक फिल्म में सब बोरिंग लगता है फिल्म के गाने स्क्रिप्ट को और कमजोर बनाते है।



अक्षय की एंट्री के बाद फिल्म में रफ्तार आती है लेकिन वह भी स्क्रिप्ट को अधिक प्रभावशाली नही बना पाते है। स्क्रिप्ट का दिलचस्प संवाद वह है जब शबाना रणवीर से पूछती है कि क्या उसका धर्म उनकी भर्ती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है इसके जवाब रणवीर ने बड़ी चतुराई से दिया है जो अद्भुत लगता है।

स्टार परफॉरमेंस रिव्यू : तापसी पन्नू ने पिंक के बाद दूसरी बार अपनी परफॉरमेंस से बॉलीवुड दर्शकों को हैरान कर दिया है। नाम शबाना में उन्होंने मुख्य भूमिका निभाई है। असफल स्क्रिप्ट के बावजूद उनके काम की सराहना हर सिने प्रेमी कर रहा है। एक्शन के आलावा भावनात्मक टूटने के दृश्यों को उन्होंने बहुत ही अच्छी से निभाया है। चेहरे का भाव सीधा व्यवहार और कॉलेज की लड़की हर भाग में उन्होंने कबीलेतारीफ़ काम किया है।



रणवीर के रूप में मनोज वाजपेयी काफी सिमित लगे है। भव्य प्रतिभा के मालिक होने के बावजूद वह उस छाप को छोड़ने में कामयाब नही हुए है जिसके लिए वह जाने जाते है इसके लिए शायद स्क्रिप्ट अधिक जिम्मेदार है। डैनी को बेबी में काफी चुस्त सरकारी नौकरशाह दिखाया गया था जो प्रशंसनीय रूप से मंत्री जी की मंजूरी प्राप्त कर लेता है लेकिन मनोज की भूमिका ऐसी नही थी।

मलयालम फिल्म इंडस्ट्री से आए थ्वीराज सुकुमारन, खलनायक के रूप में ठीक लगे है। उनकी इस भूमिका को देखकर आशा कर सकते है कि भविष्य में वह बॉलीवुड फिल्मों में अधिक नजर आयेंगे।



पेंसिल-पतली मूंछें, क्लासिक ब्राहिनी एक्शन नायक के रूप में अक्षय की जब फिल्म में एंट्री होती है तो दर्शकों को आनंद आ जाता है। अक्षय के कैमियो का स्वागत दर्शक सीटियां बजाकर करते है। अक्षय के अतरिक्त अनुमप खेर और तेहर शब्बीर सबने अपनी अपनी भूमिका को ठीक से निभाने का प्रयास किया है।

डायरेक्शन और म्यूजिक रिव्यू : नीरज पांडे की स्क्रिप्ट को शिवम नायर ने डायरेक्ट किया है जो उस दिशा में ले जाने के लिए विफल रहे है जिसके लिए नीरज पांडे जाने जाते है। इस फिल्म में सबसे बड़ी बाधा फिल्म के गीत रहे है जो फिल्म की कहानी को बीमार करते है। पहला भाग धीमा और दूसरे भाग में तेजी लाने का प्रयास किया जाता है लेकिन यह प्रयास शुरू से होता तो फिल्म अपने सही मुकाम तक पहुंच जाती।



डायरेक्टर द्वारा शूट वह दृश्य दिलचस्प लगता है जब मुंबई स्ट्रीट के बीच में जय के हत्यारे को मारने के लिए शबाना के एक्शन को कोरियोग्राफ किया जाता है। इसके अतरिक्त मुंबई के मुस्लिम वर्चस्व वाले हिस्सों की कुछ फुटेज लिए गये है वह भी शानदार है। डायरेक्टर द्वारा शबाना पर उसके घर में कैमरा ज़ूम करना भी एक बेहतरीन दृश्य बना गया है।

डायरेक्टर द्वारा शूट वह सीन बड़ा अजीब लगता है जब शबाना आखिरकार एजेंसी मुख्यालय में जाती है और उसे वहां पर एक भी महिला नही दिखती है। डायरेक्टर की एक बात और अच्छी रही है कि ट्विस्ट और टर्न्स काफी अच्छे से पेश किये है। 30-35 करोड़ की लागत से तैयार इस फिल्म के क्लाईमैक्स को और बेहतर किया जा सकता था।



कुल मिलाकर हम कह सकते है कि नाम शबाना एक आधे मन और मजबूर प्रयास से तैयार फिल्म है।

नाम शबाना फिल्म वीडियो

     

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