रंगून फिल्म वॉलपेपर

रंगून

रंगून सेलिब्रिटीज

Saif Ali Khan , Shahid Kapoor , Kangana Ranaut


रंगून फिल्म का शोर्ट रिव्यू



स्टार कास्ट : सैफ अली खान, शाहिद कपूर, कंगना राणावत

डायरेक्टर : विशाल भारद्वाज

रंगून फिल्म में क्या अच्छा है : रंगून फिल्म में विज़ुअल काफी उच्च दर्जे के है। फिल्म की अन्य बात जो सबको प्रभावित कर रही है वह यह है कि कंगना राणावत की जूलिया फिल्म की असली हीरो लगी है।



फिल्म में क्या बुरा है : फिल्म की कहानी, एड्टिंग क्लाइमैक्स थोडा कमजोर है। विशाल भारद्वाज ने फिल्म में अपनी महत्वाकांक्षाओं जोड़कर फिल्म को एक भटके हुए रास्ते पर ले जाते है। फिल्म काफी लंबी है यह बात भी फिल्म को कमजोर बनाती है।



रंगून फिल्म क्यों देखे : कंगना की बेहतरीन एक्टिंग के लिए।



रंगून फिल्म क्यों ना देखें : प्यार आजादी और युद्ध की एक उलझी हुई फिल्म है। रंगून फिल्म कोई मास्टरपीस नही है इसके अतरिक्त विशाल की कल्पना उपर उठने में विफल हुई है इसलिए सिनेमाघर की जगह इस फिल्म को हम अपने घर तक आने तक इंतजार कर सकते है।

रंगून फिल्म की पूरी कहानी

1940 के सेट पर बनी इस फिल्म की कहानी को विशाल भारद्वाज सबरीना धवन मैथ्यू रॉबिन्स ने अपनी सोच दी है। फिल्म रूसी बिलिमोरिया (सैफ अली खान) पूर्व एक्शन स्टार और ऐसा प्रोडूसर है जो जुलिया (कंगना राणावत) के स्टारडम के पीछे है। अनाथालय से 1000 रुपए देने के बाद रूसी उसे स्टार बनाता है और अब उसका आशिक है।



जूलिया श्रीमती बिलिमोरिया बनने वाली है लेकिन वह जल्द श्रीमती बनने पर थोडा असुरक्षित महसूस कर रही होती कि तभी रूसी के वादे के बाद जनरल हार्डिंग (रिचर्ड मक्काबे) जूलिया के परफॉरमेंस अपनी आर्मी को एंटरटेन करने के लिए वर्मा यात्रा तय करते है। यात्रा के दौरान एक हमले के बाद जूलिया नवाब मलिक (शाहिद कपूर) की निगरानी में रखा जाता है। नवाब मलिक एक सैनिक कैदी है जिसे अब अरुणाचल प्रदेश के विदेशी जंगलों में अब अंगरक्षक का काम सौंपा गया है।



अब यह फिल्म अपने शीर्ष पर पहुँच कर अंत की तरफ बढती है जूलिया को नवाब मलिक से प्यार हो जाता है। जूलिया के पैशनेट प्यार और श्रीमती बिलिमोरिया बनने के बीच फैसला लेना पड़ता है। इस बीच में बहुत बड़ा रहस्य सामने आ जाता है जिसे उसने अब तक छुपा कर रखा होता है। जूलिया अंत में किसका चयन करती है यह दिलचस्प बात है।

रंगून की स्क्रिप्ट समीक्षा

हम अच्छी तरह से भारद्वाज स्वाद से परिचित हैं लेकिन इस फिल्म में उनसे चूक हो गयी है। विशाल भारद्वाज ने इस फिल्म को बनाने का मन 2006 में बना लिया था लेकिन कई कारणों की वजह से ऐसा नही करे सके लेकिन अब इतने सालों के बाद उन्होंने इस फिल्म का निर्माण कर दिया था।



विश्व युद्ध 2 प्रेम त्रिकोण भारतीय स्वतंत्रता संग्राम समेत एक काव्यात्मक प्रतीक वाली यह स्क्रिप्ट एक जगह आकर अराजक बन जाती है। मकबूल और हैदर की तरह शेक्सपियर त्रासदी पेश करने की कड़ी मेहनत की है लेकिन वह उसक कद्र सफल नही हुए जिसकी उन्होंने उम्मीद की थी। जनरल हार्डिंगस अपने ब्रिटिश लहजे में उर्दू शायरी कहते हुए अजीब लगते है। जब पूरी फिल्म में दोहराते है तो बहुत ही परेशान करता है।



संयोग से जूलिया का चरित्र रील लाइफ में उनकी रियल लाइफ के सामान लगता है। वह स्क्रीन पर फाइटर की तरह लगती है लेकिन ऑफ स्क्रीन के बाहर प्यार को बचाने के लिए कुछ नही करती है। दूसरी तरफ रूसी एक उलझा हुआ व्यापारी है जो प्यार में है जिसका चरित्र सबसे कमजोर रूप में सामने आता है। स्क्रिप्ट में जूलिया और नवाब के बीच रोमांटिक पल दिखाने की बहुत जल्दबाजी दिखती है। परिस्थितियों से मजबूर होकर दोनों के बीच हॉट सेक्सी रोमांस पैदा किया जाता है।

स्क्रिप्ट में लिखे डायलग की बात करें तो विशाल ने इनको बहुत ही ठेठ रखा है जो कुछ हद तक अच्छे लगते है।



रंगून स्टार प्रदर्शन समीक्षा : जूलिया के रूप में कंगना राणावत ने बहुत ही शानदार काम किया है। उनके चरित्र में असुरक्षा निडरता और प्यार की तरफ खींचती उनकी भावनाए शामिल थे जिसे उन्होंने अच्छे से निभाया है। कंगना का जापानी सैनिक के साथ जब बात करती है तो क्वीन फिल्म की याद आती है। वह बिना जपानी भाषा के ज्ञान के उससे बात करती है।

सैफ अली खान की एक्टिंग की बात करें तो वह उम्मीद पर विफल हुए है। रूसी के रूप में उनका चेहरा तो कठोर लगता है लेकिन उनकी आवाज का एक्सेंट बच्चों की तरह है खासकर तब जब वह जूलिया को अपने प्यार की पेशकश करता है।



शाहिद कपूर ने नवाब मलिक के रूप में अच्छी एक्टिंग की है। कठोर सैनिक लचीली मांसपेशियां और उनका अंदाज लोगो को अपनी तरफ आकर्षित करता है। जनरल हार्डिंगस के रूप में रिचर्ड मक्काबे उर्दू शायरी बोलते हुए थोडा असहज महसूस करते है लेकिन एक खलनायक के रूप में अपने दुश्मन के साथ पहले हंसते है फिर उसे मारते है तो अच्छे लगते है।

डायरेक्शन और म्यूजिक रिव्यू : एक बिंदु पर आकर फिल्म ऐसी लगती है जैसे जूलिया दो किरदारों चर्चिल और हिटलर के रूप में स्किट प्रदर्शन कर रही है। कमेंट्री और प्रस्तुति रंगून के लिए सबसे अफसोस वाला दृश्य था। बात फिल्म के सिनेमेटोग्राफी की करें तो भारद्वाज की रंगून फिल्म के वीएफएक्स को कोई नजरअंदाज नही कर सकता है। रेल इंजन से धुआं निकलने वाले सीन पर लाइटिंग और प्रोडक्शन डिज़ाइन डिपार्टमेंट ने शानदार काम किया है। युद्ध से त्रस्त क्षेत्रों के टूटी चर्च, जूलिया और नवाब का रिफ्यूजी बन शरण में जाना कुछ बेहतरीन दृश्य है।



विशाल भारद्वाज ने फिल्म में काम कर रहे सभी किरदारों की ड्रेस की तैयारी अच्छी तरह की है और इसके लिए वह तारीफ़ के हकदार भी है। इस फिल्म में कंगना और शाहिद के बीच केमिस्ट्री कम प्रतीत होती है, फिल्म में पैशन, इंटिमेट किसिंग और बोल्ड हर तरह के सीन है लेकिन इश्क जुनून से भरे इन प्रेमी जोड़ियों के बीच वो केमिस्ट्री नजर नही आती जो बागी आशिकों में होती है।

डायरेक्टर विशाल ने वैसे तो हर चीज को बहुत ख़ूबसूरती से शूट किया है लेकिन फिल्म के पहले भाग को देखने से साफ़ लगता है कि फिल्म की गति काफी धीमी नजर आती है और फिर अपने चरम तक बढ़ती है।

विशाल ने इस फिल्म पर काफी रिसर्च की है इसलिए 40 के दशक का बेहतरीन तरीके से दर्शकों के सामने पेश किया है। वर्ल्ड वॉर, आजाद हिन्द फौज, ब्रिटिश शासन, रोमांस, धोखा, देशभक्ति इतने सारे भरकम विषयों को 2 घंटे 46 मिनट में समेटने का प्रयास किया है जिसकी वजह से फिल्म की कहानी कमजोर हो जाती है।



फिल्म के संगीत की बात करें तो ब्लडी हेल, टिप्पा और मेरे पिया गए इंग्लैंड फिल्म के बेहतरीन गीत है। ये इश्क है और अलविदा गीत भी आपको सुनने में अच्छे लगेंगे।

रंगून फिल्म वीडियो

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