शिवाय फिल्म वॉलपेपर

शिवाय सेलिब्रिटीज

Ajay Devgan , Sayesha Saigal , Erika Kaar


इफेक्ट्स, स्टंट और दमदार एक्शन से शिवाय को बचाने का असफल प्रयास



शिवाय फिल्म का शोर्ट रिव्यू :

स्टारकास्ट : अजय देवगन, एरिका कार, एबिगेल एमएस, सायशा सहगल, वीर दास

डायरेक्टर : अजय देवगन



शिवाय फिल्म में क्या अच्छा है : शिवाय फिल्म का ट्रेलर, लोकेशन और सिनेमेटोग्राफी बेहद लुभावनी है

शिवाय फिल्म में बुरा क्या है : फिल्म की कहानी हॉलीवुड फिल्म टेकन से प्ररित है। फिल्म की स्टोरी काफी लंबी है इसके अतरिक्त फिल्म से जुडा महाकाव्य किसी भी तरह से भावनात्मक कनेक्ट नही होता है। अजय-एरिका के इंटिमेट दृश्य से कही अधिक ध्यान फिल्म के क्लाइमेक्स पर देने की जरूरत थी जो जरूरत से अधिक खींचा गया है।

फिल्म क्यों देखे : अजय देवगन के प्रशंसकों को उनका हर रूप पसंद आता है, अजय देवगन के एक्शन के अतरिक्त पाकिस्तानी कलाकारों का विरोध जताने के लिए भी आप इस फिल्म को देख सकते है।



फिल्म क्यों ना देखे : शिवाय एक एक्शन ड्रामा है लेकिन फिल्म में इमोशन नही है। 2 घंटे 40 मिनट तक इस फिल्म को देखना निश्चित ही आपके लिए एक मुश्किल काम हो सकता है।

शिवाय फिल्म की पूरी कहानी : शिवाय एक पर्वतारोही जो हिमालय में यात्रा का आयोजन करता है। अपनी यात्राओं में से एक में वह ओल्गा (एरिका कार ) से मिलता है। ओल्गा बुल्गारिया की निवासी है। यात्रा के दौरान एक घातक हिमस्खलन होता है लेकिन ओल्गा की जान बचाने में शिवाय कामयाब हो जाता है। इस हादसे के बाद ओल्गा और शिवाय एक दूसरे के प्यार में पड़ जाते है।



कहानी में एक जबरजस्त हॉट इंटिमेट सीन आता है और ओल्गा गर्भवती हो जाती है लेकिन ओल्गा बच्चे को जन्म नही देना चाहती है। शिवाय के जिद्द और आग्रह करने के बाद वह बच्चे को जन्म देने के लिए राजी हो जाती है लेकिन उसके साथ रहने के लिए तैयार नही होती है।

शिवाय को बेटी गौरा (एबिगेल) बोलने में सक्षम नही है और नौ साल बाद गौर को पता चलता है की उसकी माँ जीवित है। गौर माँ के पास बुल्गारिया जाने की जिद्द करती है और यहाँ से बेटी और पिता शिवाय का सफर शुरू हो जाता है। इस यात्रा के दौरान गौरा को बच्चे की तस्करी करने वाल गिरोह किडनैप कर लेता है जिसके बाद अपहर्ताओं और शिवाय के बीचे चूहे बिल्ली का खेल शुरू हो जाता है।



शिवाय अपनी बेटी की कहाँ तक रक्षा कर पाता है और गौरा को बचाने के लिए कब तक सक्षम रहता है यह जनाने के लिए आपको सिनेमाघर तक जाना है।

स्क्रिप्ट रिव्यू : अजय देवगन ने पिछली बार यू मी और हम की थी। सालों बाद एक बार फिर से शिवाय मूवी के साथ उन्होंने डायरेक्शन में हाथ अजमाने का प्रयास किया है। अफोसस की बात यह है की दूसरी बार भी स्क्रिप्ट समझ में उन्होंने सुधार किया है। शिवाय फिल्म की स्क्रिप्ट को संदीप श्रीवास्तव और रॉबिन भट्ट ने भी लिखा है।

अजय देवगन की इस फिल्म में पिता-पुत्री के संबंधों के साथ साथ एक्शन, ड्रामा, रोमांस, लव स्टोरी, प्यार में दर्द सब कुछ था लेकिन दुर्भाग्य से इन सभी का संगम अच्छे से नही हुआ है। फिल्म में कई आसू वाले दृश्य है लेकिन लेकिन खराब लेखन के कारण वह सीन उभर कर सामने नही आ सका है। ऐसा एक दर्दनाक दृश्य अनु (सायशा) और उसके पिता के बीच हो सकता था।



राइटर्स की यह बात समझ नही आती है की एक आदमी जो हिमालय से बाहर कदम नही रखता है वह बड़ी आसानी से बुल्गारियाई देह व्यापार का रैकेट बंद करा देता है। सिनेमाई स्वतंत्रता लेखकों ने शिवाय को ऐसा वीर बनाया है जो किसी भी समय कुछ भी करने को सक्षम है वह भी बड़ी आसानी से, उसके लिए परिस्थितयां कोई मायने नही रखती है।

स्क्रिप्ट में जो डायलॉग है वह भी अधिकतर बेतुके है। जिन लड़कियों के अच्छे बाप होते है उनकी तलाश बहुत लंबी हो जाती है इसके अतरिक्त तराई में रहने वालों को उचाई पर रहने वालों की हमेशा जरूरत पड़ती है। इसके अतरिक्त मुलाकातों को दिन और हफ्तों से क्यों गिना जाता है। साँसों से क्यों नही।। अगर सांसों से गिना जाएं तो लगेगा।।। बहुत लंबी उम्र है।। इस कम उम्र रिस्ते की।। फिल्म में ऐसी कई डायलॉग है जो दर्शको को बिलकुल भी पसंद नही आते है।

स्टार परफॉरमेंस :
शिवाय फिल्म पूरी तरह से अजय देवगन की फिल्म है। अजय देवगन की एक्टिंग पर शक नही किया जा सकता है और उनकी ऑंखें उनके किरदार में चार चाँद लगा देते है लेकिन इस फिल्म में सब कुछ फीका था। क्योकि इस फिल्म में ना तो सिंघम की तरह दहाड़ थी ना ही उनके एक्शन उतने दमदार थे जितना लोगो ने इस फिल्म से अपेक्षा की थी।



अजय वैसे तो फिल्म के दूसरे भाग में काफी अच्छे लगे है लेकिन फिल्म बचाने के लिए इतना काफी नही था। फिल्म की दूसरी मुख्य कलाकार एरिका कार अजीब हिंदी से अधिक इंग्लिश बोलती नजर आती है इसलिए उनके बारें में सिर्फ इतना कहा जा सकता है की उनकी एक्टिंग ठीक ठाक थी।

सायशा सहगल की बात करें तो उनकी भूमिका बहुत छोटी थी और उनकी यह डेब्यू फिल्म थी इसलिए यह बिलकुल नही कहा जा सकता की डेब्यू फिल्म के लिए उनका चुनाव अच्छा था उनको और विकल्पों पर ध्यान देना चाहिए था क्योकि भूमिका में दम नही था।

अजय देवगन के बाद अबीगैल का फिल्म का अहम किरदार था लेकिन एक जैसे इमोशन की वजह से उनकी भूमिका बिगड़ जाती है। इस रोल में और अधिक अच्छा काम लिया जा सकता था।



गिरीश कर्नाड और वीर दास फिल्म में अनावश्यक ही लगते है।

डायरेक्शन और म्यूजिक रिव्यू : लगभग दो साल के बाद अजय देवगन ने शिवाय को अपने मास्टरपीस की तरह बॉक्स ऑफिस पर उतारा है लेकिन उनकी यह फिल्म सिर्फ एक माइंडलेस एक्शन फिल्म बन कर उभरी है। फिल्म की लोकेशन आपका दिल जीत लेगी। इसके अतरिक्त अजय ने इस फिल्म को इतना लम्बा कर दिया है की अंत आते तक दर्शक इस फिल्म के प्रति अपनी रूचि खो देते है। असल में फिल्म के साथ साथ तथ्य यह है कि फिल्म को क्रिस्पी बनाने के चक्कर में जबरदस्ती घसीटा गया है जो साफ़ साफ़ नजर आता है।



फिल्म की सबसे बड़ी समस्या कहानी है उसके अजय का किरदार में धैर्य नही नजर आता है तो फिल्म के विलेन भी कमजोर और चंचल रूप में है। फिल्म के वीएफएक्स को बड़े ही सरल तरीके से पेश किया गया है। फिल्म के संगीत की बात करें तो हर हर महादेव अधिक समय तक चलने वाला गीत है इस गीत के अतरिक्त दरखास्त गीत भी सुनने लायक बन पड़ा है।

फिल्म का स्पेशल इफेक्ट्स स्टंट एक्शन और कैमरा वर्क कमाल का है लेकिन फिल्म की कहानी शून्य है।

शिवाय फिल्म वीडियो

        

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